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Monday, 30 March 2020

Samanya Hindi | Hindi Grammar GK | हिन्दी व्याकरण सामान्य ज्ञान प्रश्न उत्तर Part-2

हिन्दी व्याकरण 
सामान्य ज्ञान प्रश्न उत्तर

Samanya Hindi | Hindi Grammar GK

Part-2



संधि एवं संधि विच्छेद



संधि

संधि दो शब्दों से मिलकर बना है – सम् + धि। जिसका अर्थ होता है ‘मिलना ‘। हमारी हिंदी भाषा में संधि के द्वारा पुरे शब्दों को लिखने की परम्परा नहीं है। लेकिन संस्कृत में संधि के बिना कोई काम नहीं चलता। संस्कृत की व्याकरण की परम्परा बहुत पुरानी है। संस्कृत भाषा को अच्छी तरह जानने के लिए व्याकरण को पढना जरूरी है। शब्द रचना में भी संधियाँ काम करती हैं। जब दो शब्द मिलते हैं तो पहले शब्द की अंतिम ध्वनि और दूसरे शब्द की पहली ध्वनि आपस में मिलकर जो परिवर्तन लाती हैं उसे संधि कहते हैं। अथार्त संधि किये गये शब्दों को अलग-अलग करके पहले की तरह करना ही संधि विच्छेद कहलाता है। अथार्त जब दो शब्द आपस में मिलकर कोई तीसरा शब्द बनती हैं तब जो परिवर्तन होता है , उसे संधि कहते हैं। उदहारण :- हिमालय = हिम + आलय , सत् + आनंद =सदानंद। संधि के प्रकार :- संधि तीन प्रकार की होती हैं :- ● स्वर संधि ● व्यंजन संधि ● विसर्ग संधि


स्वर संधि

जब स्वर के साथ स्वर का मेल होता है तब जो परिवर्तन होता है उसे स्वर संधि कहते हैं। हिंदी में स्वरों की संख्या ग्यारह होती है। बाकी के अक्षर व्यंजन होते हैं। जब दो स्वर मिलते हैं जब उससे जो तीसरा स्वर बनता है उसे स्वर संधि कहते हैं। उदहारण :- विद्या + आलय = विद्यालय। स्वर संधि पांच प्रकार की होती हैं :- (क) दीर्घ संधि (ख) गुण संधि (ग) वृद्धि संधि (घ) यण संधि (ड)अयादि संधि ★ दीर्घ संधि :- जब ( अ , आ ) के साथ ( अ , आ ) हो तो ‘ आ ‘ बनता है , जब ( इ , ई ) के साथ ( इ , ई ) हो तो ‘ ई ‘ बनता है , जब ( उ , ऊ ) के साथ ( उ , ऊ ) हो तो ‘ ऊ ‘ बनता है। अथार्त सूत्र – अक: सवर्ण – दीर्घ: मतलब अक प्रत्याहार के बाद अगर सवर्ण हो तो दो मिलकर दीर्घ बनते हैं। दूसरे शब्दों में हम कहें तो जब दो सुजातीय स्वर आस – पास आते हैं तब जो स्वर बनता है उसे सुजातीय दीर्घ स्वर कहते हैं , इसी को स्वर संधि की दीर्घ संधि कहते हैं। इसे ह्रस्व संधि भी कहते हैं। उदहारण :- धर्म + अर्थ = धर्मार्थ पुस्तक + आलय = पुस्तकालय विद्या + अर्थी = विद्यार्थी रवि + इंद्र = रविन्द्र गिरी +ईश = गिरीश मुनि + ईश =मुनीश मुनि +इंद्र = मुनींद्र भानु + उदय = भानूदय वधू + ऊर्जा = वधूर्जा विधु + उदय = विधूदय भू + उर्जित = भुर्जित। ★ गुण संधि :- जब ( अ , आ ) के साथ ( इ , ई ) हो तो ‘ ए ‘ बनता है , जब ( अ , आ )के साथ ( उ , ऊ ) हो तो ‘ ओ ‘बनता है , जब ( अ , आ ) के साथ ( ऋ ) हो तो ‘ अर ‘ बनता है। उसे गुण संधि कहते हैं। उदहारण :- नर + इंद्र + नरेंद्र सुर + इन्द्र = सुरेन्द्र ज्ञान + उपदेश = ज्ञानोपदेश भारत + इंदु = भारतेन्दु देव + ऋषि = देवर्षि सर्व + ईक्षण = सर्वेक्षण ★ वृद्धि संधि :- जब ( अ , आ ) के साथ ( ए , ऐ ) हो तो ‘ ऐ ‘ बनता है और जब ( अ , आ ) के साथ ( ओ , औ )हो तो ‘ औ ‘ बनता है। उसे वृधि संधि कहते हैं। उदहारण :- मत+एकता = मतैकता एक +एक =एकैक धन + एषणा = धनैषणा सदा + एव = सदैव महा + ओज = महौज ★ यण संधि क्या होती है :- जब ( इ , ई ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘ य ‘ बन जाता है , जब ( उ , ऊ ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘ व् ‘ बन जाता है , जब ( ऋ ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘ र ‘ बन जाता है। यण संधि के तीन प्रकार के संधि युक्त्त पद होते हैं। (1) य से पूर्व आधा व्यंजन होना चाहिए। (2) व् से पूर्व आधा व्यंजन होना चाहिए। (3) शब्द में त्र होना चाहिए। यण स्वर संधि में एक शर्त भी दी गयी है कि य और त्र में स्वर होना चाहिए और उसी से बने हुए शुद्ध व् सार्थक स्वर को + के बाद लिखें। उसे यण संधि कहते हैं। उदहारण :- इति + आदि = इत्यादि परी + आवरण = पर्यावरण अनु + अय = अन्वय सु + आगत = स्वागत अभी + आगत = अभ्यागत ★ अयादि संधि क्या होती है :- जब ( ए , ऐ , ओ , औ ) के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ‘ ए – अय ‘ में , ‘ ऐ – आय ‘ में , ‘ ओ – अव ‘ में, ‘ औ – आव ‘ ण जाता है। य , व् से पहले व्यंजन पर अ , आ की मात्रा हो तो अयादि संधि हो सकती है लेकिन अगर और कोई विच्छेद न निकलता हो तो + के बाद वाले भाग को वैसा का वैसा लिखना होगा। उसे अयादि संधि कहते हैं। उदहारण :- ने + अन = नयन नौ + इक = नाविक भो + अन = भवन पो + इत्र = पवित्र


व्यंजन संधि

जब व्यंजन को व्यंजन या स्वर के साथ मिलाने से जो परिवर्तन होता है , उसे व्यंजन संधि कहते हैं। उदहारण :- दिक् + अम्बर = दिगम्बर अभी + सेक = अभिषेक व्यंजन संधि के 13 नियम होते हैं :- (1) जब किसी वर्ग के पहले वर्ण क्, च्, ट्, त्, प् का मिलन किसी वर्ग के तीसरे या चौथे वर्ण से या य्, र्, ल्, व्, ह से या किसी स्वर से हो जाये तो क् को ग् , च् को ज् , ट् को ड् , त् को द् , और प् को ब् में बदल दिया जाता है अगर स्वर मिलता है तो जो स्वर की मात्रा होगी वो हलन्त वर्ण में लग जाएगी लेकिन अगर व्यंजन का मिलन होता है तो वे हलन्त ही रहेंगे। उदहारण :- ★ क् के ग् में बदलने के उदहारण – दिक् + अम्बर = दिगम्बर दिक् + गज = दिग्गज वाक् +ईश = वागीश ★ च् के ज् में बदलने के उदहारण :- अच् +अन्त = अजन्त अच् + आदि =अजादी ★ ट् के ड् में बदलन के उदहारण :- षट् + आनन = षडानन षट् + यन्त्र = षड्यन्त्र षड्दर्शन = षट् + दर्शन षड्विकार = षट् + विकार षडंग = षट् + अंग ★ त् के द् में बदलने के उदहारण :- तत् + उपरान्त = तदुपरान्त सदाशय = सत् + आशय तदनन्तर = तत् + अनन्तर उद्घाटन = उत् + घाटन जगदम्बा = जगत् + अम्बा अप् + द = अब्द अब्ज = अप् + ज (2) यदि किसी वर्ग के पहले वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) का मिलन न या म वर्ण ( ङ,ञ ज, ण, न, म) के साथ हो तो क् को ङ्, च् को ज्, ट् को ण्, त् को न्, तथा प् को म् में बदल दिया जाता है। उदहारण :- ★ क् के ङ् में बदलने के उदहारण :- वाक् + मय = वाङ्मय दिङ्मण्डल = दिक् + मण्डल प्राङ्मुख = प्राक् + मुख ★ ट् के ण् में बदलने के उदहारण :- षट् + मास = षण्मास षट् + मूर्ति = षण्मूर्ति षण्मुख = षट् + मुख ★ त् के न् में बदलने के उदहारण :- उत् + नति = उन्नति जगत् + नाथ = जगन्नाथ उत् + मूलन = उन्मूलन ★ प् के म् में बदलने के उदहारण :- अप् + मय = अम्मय (3) जब त् का मिलन ग, घ, द, ध, ब, भ, य, र, व से या किसी स्वर से हो तो द् बन जाता है। म के साथ क से म तक के किसी भी वर्ण के मिलन पर ‘ म ‘ की जगह पर मिलन वाले वर्ण का अंतिम नासिक वर्ण बन जायेगा। उदहारण :- ★ म् + क ख ग घ ङ के उदहारण :- सम् + कल्प = संकल्प/सटड्ढन्ल्प सम् + ख्या = संख्या सम् + गम = संगम शंकर = शम् + कर ★ म् + च, छ, ज, झ, ञ के उदहारण :- सम् + चय = संचय किम् + चित् = किंचित सम् + जीवन = संजीवन ★ म् + ट, ठ, ड, ढ, ण के उदहारण :- दम् + ड = दण्ड/दंड खम् + ड = खण्ड/खंड ★ म् + त, थ, द, ध, न के उदहारण :- सम् + तोष = सन्तोष/संतोष किम् + नर = किन्नर सम् + देह = सन्देह ★ म् + प, फ, ब, भ, म के उदहारण :- सम् + पूर्ण = सम्पूर्ण/संपूर्ण सम् + भव = सम्भव/संभव ★ त् + ग , घ , ध , द , ब , भ ,य , र , व् के उदहारण :- सत् + भावना = सद्भावना जगत् + ईश =जगदीश भगवत् + भक्ति = भगवद्भक्ति तत् + रूप = तद्रूपत सत् + धर्म = सद्धर्म (4) त् से परे च् या छ् होने पर च, ज् या झ् होने पर ज्, ट् या ठ् होने पर ट्, ड् या ढ् होने पर ड् और ल होने पर ल् बन जाता है। म् के साथ य, र, ल, व, श, ष, स, ह में से किसी भी वर्ण का मिलन होने पर ‘म्’ की जगह पर अनुस्वार ही लगता है। ★ म + य , र , ल , व् , श , ष , स , ह के उदहारण :- सम् + रचना = संरचना सम् + लग्न = संलग्न सम् + वत् = संवत् सम् + शय = संशय ★ त् + च , ज , झ , ट , ड , ल के उदहारण :- उत् + चारण = उच्चारण सत् + जन = सज्जन उत् + झटिका = उज्झटिका तत् + टीका =तट्टीका उत् + डयन = उड्डयन उत् +लास = उल्लास (5)जब त् का मिलन अगर श् से हो तो त् को च् और श् को छ् में बदल दिया जाता है। जब त् या द् के साथ च या छ का मिलन होता है तो त् या द् की जगह पर च् बन जाता है। उदहारण :- उत् + चारण = उच्चारण शरत् + चन्द्र = शरच्चन्द्र उत् + छिन्न = उच्छिन्न ★ त् + श् के उदहारण :- उत् + श्वास = उच्छ्वास उत् + शिष्ट = उच्छिष्ट सत् + शास्त्र = सच्छास्त्र (6) जब त् का मिलन ह् से हो तो त् को द् और ह् को ध् में बदल दिया जाता है। त् या द् के साथ ज या झ का मिलन होता है तब त् या द् की जगह पर ज् बन जाता है। उदहारण :- सत् + जन = सज्जन जगत् + जीवन = जगज्जीवन वृहत् + झंकार = वृहज्झंकार ★ त् + ह के उदहारण :- उत् + हार = उद्धार उत् + हरण = उद्धरण तत् + हित = तद्धित (7) स्वर के बाद अगर छ् वर्ण आ जाए तो छ् से पहले च् वर्ण बढ़ा दिया जाता है। त् या द् के साथ ट या ठ का मिलन होने पर त् या द् की जगह पर ट् बन जाता है। जब त् या द् के साथ ‘ड’ या ढ की मिलन होने पर त् या द् की जगह पर‘ड्’बन जाता है। उदहारण :- तत् + टीका = तट्टीका वृहत् + टीका = वृहट्टीका भवत् + डमरू = भवड्डमरू ★ अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, + छ के उदहारण :- स्व + छंद = स्वच्छंद आ + छादन =आच्छादन संधि + छेद = संधिच्छेद अनु + छेद =अनुच्छेद (8) अगर म् के बाद क् से लेकर म् तक कोई व्यंजन हो तो म् अनुस्वार में बदल जाता है। त् या द् के साथ जब ल का मिलन होता है तब त् या द् की जगह पर ‘ल्’ बन जाता है। उदहारण :- उत् + लास = उल्लास तत् + लीन = तल्लीन विद्युत् + लेखा = विद्युल्लेखा ★ म् + च् , क, त, ब , प के उदहारण :- किम् + चित = किंचित किम् + कर = किंकर सम् +कल्प = संकल्प सम् + चय = संचयम सम +तोष = संतोष सम् + बंध = संबंध सम् + पूर्ण = संपूर्ण (9) म् के बाद म का द्वित्व हो जाता है। त् या द् के साथ ‘ह’ के मिलन पर त् या द् की जगह पर द् तथा ह की जगह पर ध बन जाता है। उदहारण :- उत् + हार = उद्धार/उद्धार उत् + हृत = उद्धृत/उद्धृत पद् + हति = पद्धति ★ म् + म के उदहारण :- सम् + मति = सम्मति सम् + मान = सम्मान (10) म् के बाद य्, र्, ल्, व्, श्, ष्, स्, ह् में से कोई व्यंजन आने पर म् का अनुस्वार हो जाता है।‘त् या द्’ के साथ ‘श’ के मिलन पर त् या द् की जगह पर ‘च्’ तथा ‘श’ की जगह पर ‘छ’ बन जाता है। उदहारण :- उत् + श्वास = उच्छ्वास उत् + शृंखल = उच्छृंखल शरत् + शशि = शरच्छशि ★ म् + य, र, व्,श, ल, स, के उदहारण :- सम् + योग = संयोग सम् + रक्षण = संरक्षण सम् + विधान = संविधान सम् + शय =संशय सम् + लग्न = संलग्न सम् + सार = संसार (11) ऋ, र्, ष् से परे न् का ण् हो जाता है। परन्तु चवर्ग, टवर्ग, तवर्ग, श और स का व्यवधान हो जाने पर न् का ण् नहीं होता। किसी भी स्वर के साथ ‘छ’ के मिलन पर स्वर तथा ‘छ’ के बीच ‘च्’ आ जाता है। उदहारण :- आ + छादन = आच्छादन अनु + छेद = अनुच्छेद शाला + छादन = शालाच्छादन स्व + छन्द = स्वच्छन्द ★ र् + न, म के उदहारण :- परि + नाम = परिणाम प्र + मान = प्रमाण (12) स् से पहले अ, आ से भिन्न कोई स्वर आ जाए तो स् को ष बना दिया जाता है। उदहारण :- वि + सम = विषम अभि + सिक्त = अभिषिक्त अनु + संग = अनुषंग ★ भ् + स् के उदहारण :- अभि + सेक = अभिषेक नि + सिद्ध = निषिद्ध वि + सम + विषम (13)यदि किसी शब्द में कही भी ऋ, र या ष हो एवं उसके साथ मिलने वाले शब्द में कहीं भी ‘न’ हो तथा उन दोनों के बीच कोई भी स्वर,क, ख ग, घ, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व में से कोई भी वर्ण हो तो सन्धि होने पर ‘न’ के स्थान पर ‘ण’ हो जाता है। जब द् के साथ क, ख, त, थ, प, फ, श, ष, स, ह का मिलन होता है तब द की जगह पर त् बन जाता है। उदहारण :- राम + अयन = रामायण परि + नाम = परिणाम नार + अयन = नारायण संसद् + सदस्य = संसत्सदस्य तद् + पर = तत्पर सद् + कार = सत्कार


विसर्ग संधि

विसर्ग के बाद जब स्वर या व्यंजन आ जाये तब जो परिवर्तन होता है उसे विसर्ग संधि कहते हैं। उदहारण :- मन: + अनुकूल = मनोनुकूल नि:+अक्षर = निरक्षर नि: + पाप =निष्पाप विसर्ग संधि के 10 नियम होते हैं :- (1) विसर्ग के साथ च या छ के मिलन से विसर्ग के जगह पर ‘श्’बन जाता है। विसर्ग के पहले अगर ‘अ’और बाद में भी ‘अ’ अथवा वर्गों के तीसरे, चौथे , पाँचवें वर्ण, अथवा य, र, ल, व हो तो विसर्ग का ओ हो जाता है। उदहारण :- मनः + अनुकूल = मनोनुकूल अधः + गति = अधोगति मनः + बल = मनोबल निः + चय = निश्चय दुः + चरित्र = दुश्चरित्र ज्योतिः + चक्र = ज्योतिश्चक्र निः + छल = निश्छल विच्छेद :- तपश्चर्या = तपः + चर्या अन्तश्चेतना = अन्तः + चेतना हरिश्चन्द्र = हरिः + चन्द्र अन्तश्चक्षु = अन्तः + चक्षु (2) विसर्ग से पहले अ, आ को छोड़कर कोई स्वर हो और बाद में कोई स्वर हो, वर्ग के तीसरे, चौथे, पाँचवें वर्ण अथवा य्, र, ल, व, ह में से कोई हो तो विसर्ग का र या र् हो जाता ह। विसर्ग के साथ ‘श’ के मेल पर विसर्ग के स्थान पर भी ‘श्’ बन जाता है। दुः + शासन = दुश्शासन यशः + शरीर = यशश्शरीर निः + शुल्क = निश्शुल्क विच्छेद :- निश्श्वास = निः + श्वास चतुश्श्लोकी = चतुः + श्लोकी निश्शंक = निः + शंक निः + आहार = निराहार निः + आशा = निराशा निः + धन = निर्धन (3) विसर्ग से पहले कोई स्वर हो और बाद में च, छ या श हो तो विसर्ग का श हो जाता है। विसर्ग के साथ ट, ठ या ष के मेल पर विसर्ग के स्थान पर ‘ष्’ बन जाता है। धनुः + टंकार = धनुष्टंकार चतुः + टीका = चतुष्टीका चतुः + षष्टि = चतुष्षष्टि निः + चल = निश्चल निः + छल = निश्छल दुः + शासन = दुश्शासन (4)विसर्ग के बाद यदि त या स हो तो विसर्ग स् बन जाता है। यदि विसर्ग के पहले वाले वर्ण में अ या आ के अतिरिक्त अन्य कोई स्वर हो तथा विसर्ग के साथ मिलने वाले शब्द का प्रथम वर्ण क, ख, प, फ में से कोई भी हो तो विसर्ग के स्थान पर ‘ष्’ बन जायेगा। निः + कलंक = निष्कलंक दुः + कर = दुष्कर आविः + कार = आविष्कार चतुः + पथ = चतुष्पथ निः + फल = निष्फल विच्छेद :- निष्काम = निः + काम निष्प्रयोजन = निः + प्रयोजन बहिष्कार = बहिः + कार निष्कपट = निः + कपट नमः + ते = नमस्ते निः + संतान = निस्संतान दुः + साहस = दुस्साहस (5) विसर्ग से पहले इ, उ और बाद में क, ख, ट, ठ, प, फ में से कोई वर्ण हो तो विसर्ग का ष हो जाता है। यदि विसर्ग के पहले वाले वर्ण में अ या आ का स्वर हो तथा विसर्ग के बाद क, ख, प, फ हो तो सन्धि होने पर विसर्ग भी ज्यों का त्यों बना रहेगा। अधः + पतन = अध: पतन प्रातः + काल = प्रात: काल अन्त: + पुर = अन्त: पुर वय: क्रम = वय: क्रम विच्छेद :- रज: कण = रज: + कण तप: पूत = तप: + पूत पय: पान = पय: + पान अन्त: करण = अन्त: + करण अपवाद* भा: + कर = भास्कर नम: + कार = नमस्कार पुर: + कार = पुरस्कार श्रेय: + कर = श्रेयस्कर बृह: + पति = बृहस्पति पुर: + कृत = पुरस्कृत तिर: + कार = तिरस्कार निः + कलंक = निष्कलंक चतुः + पाद = चतुष्पाद निः + फल = निष्फल (6) विसर्ग से पहले अ, आ हो और बाद में कोई भिन्न स्वर हो तो विसर्ग का लोप हो जाता है। विसर्ग के साथ त या थ के मेल पर विसर्ग के स्थान पर ‘स्’ बन जायेगा। अन्त: + तल = अन्तस्तल नि: + ताप = निस्ताप दु: + तर = दुस्तर नि: + तारण = निस्तारण विच्छेद :- निस्तेज = निः + तेज नमस्ते = नम: + ते मनस्ताप = मन: + ताप बहिस्थल = बहि: + थल निः + रोग = निरोग निः + रस = नीरस (7) विसर्ग के बाद क, ख अथवा प, फ होने पर विसर्ग में कोई परिवर्तन नहीं होता। विसर्ग के साथ ‘स’ के मेल पर विसर्ग के स्थान पर ‘स्’ बन जाता है। नि: + सन्देह = निस्सन्देह दु: + साहस = दुस्साहस नि: + स्वार्थ = निस्स्वार्थ दु: + स्वप्न = दुस्स्वप्न विच्छेद निस्संतान = नि: + संतान दुस्साध्य = दु: + साध्य मनस्संताप = मन: + संताप पुनस्स्मरण = पुन: + स्मरण अंतः + करण = अंतःकरण (8) यदि विसर्ग के पहले वाले वर्ण में ‘इ’ व ‘उ’ का स्वर हो तथा विसर्ग के बाद ‘र’ हो तो सन्धि होने पर विसर्ग का तो लोप हो जायेगा साथ ही ‘इ’ व ‘उ’ की मात्रा ‘ई’ व ‘ऊ’ की हो जायेगी। नि: + रस = नीरस नि: + रव = नीरव नि: + रोग = नीरोग दु: + राज = दूराज विच्छेद नीरज = नि: + रज नीरन्द्र = नि: + रन्द्र चक्षूरोग = चक्षु: + रोग दूरम्य = दु: + रम्य (9) विसर्ग के पहले वाले वर्ण में ‘अ’ का स्वर हो तथा विसर्ग के साथ अ के अतिरिक्त अन्य किसी स्वर के मेल पर विसर्ग का लोप हो जायेगा तथा अन्य कोई परिवर्तन नहीं होगा। अत: + एव = अतएव मन: + उच्छेद = मनउच्छेद पय: + आदि = पयआदि तत: + एव = ततएव (10) विसर्ग के पहले वाले वर्ण में ‘अ’ का स्वर हो तथा विसर्ग के साथ अ, ग, घ, ड॰, ´, झ, ज, ड, ढ़, ण, द, ध, न, ब, भ, म, य, र, ल, व, ह में से किसी भी वर्ण के मेल पर विसर्ग के स्थान पर ‘ओ’ बन जायेगा। मन: + अभिलाषा = मनोभिलाषा सर: + ज = सरोज वय: + वृद्ध = वयोवृद्ध यश: + धरा = यशोधरा मन: + योग = मनोयोग अध: + भाग = अधोभाग तप: + बल = तपोबल मन: + रंजन = मनोरंजन विच्छेद मनोनुकूल = मन: + अनुकूल मनोहर = मन: + हर तपोभूमि = तप: + भूमि पुरोहित = पुर: + हित यशोदा = यश: + दा अधोवस्त्र = अध: + वस्त्र अपवाद पुन: + अवलोकन = पुनरवलोकन पुन: + ईक्षण = पुनरीक्षण पुन: + उद्धार = पुनरुद्धार पुन: + निर्माण = पुनर्निर्माण अन्त: + द्वन्द्व = अन्तद्र्वन्द्व अन्त: + देशीय = अन्तर्देशीय अन्त: + यामी = अन्तर्यामी




अलंकार

अलंकार दो शब्दों से मिलकर बना होता है – अलम + कार। यहाँ पर अलम का अर्थ होता है ‘ आभूषण। मानव समाज बहुत ही सौन्दर्योपासक है उसकी प्रवर्ती के कारण ही अलंकारों को जन्म दिया गया है। जिस तरह से एक नारी अपनी सुन्दरता को बढ़ाने के लिए आभूषणों को प्रयोग में लाती हैं उसी प्रकार भाषा को सुन्दर बनाने के लिए अलंकारों का प्रयोग किया जाता है। अथार्त जो शब्द काव्य की शोभा को बढ़ाते हैं उसे अलंकार कहते हैं। उदाहरण :- ‘ भूषण बिना न सोहई – कविता , बनिता मित्त।’ अलंकार के भेद :- ● शब्दालंकार ● अर्थालंकार ● उभयालंकार


1. शब्दालंकार

शब्दालंकार दो शब्दों से मिलकर बना होता है – शब्द + अलंकार। शब्द के दो रूप होते हैं – ध्वनी और अर्थ। ध्वनि के आधार पर शब्दालंकार की सृष्टी होती है। जब अलंकार किसी विशेष शब्द की स्थिति में ही रहे और उस शब्द की जगह पर कोई और पर्यायवाची शब्द के रख देने से उस शब्द का अस्तित्व न रहे उसे शब्दालंकार कहते हैं। अर्थार्त जिस अलंकार में शब्दों को प्रयोग करने से चमत्कार हो जाता है और उन शब्दों की जगह पर समानार्थी शब्द को रखने से वो चमत्कार समाप्त हो जाये वहाँ शब्दालंकार होता है। शब्दालंकार के भेद :- → अनुप्रास अलंकार → यमक अलंकार → पुनरुक्ति अलंकार → विप्सा अलंकार → वक्रोक्ति अलंकार → शलेष अलंकार ★ अनुप्रास अलंकार :- अनुप्रास शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – अनु + प्रास | यहाँ पर अनु का अर्थ है- बार -बार और प्रास का अर्थ होता है – वर्ण। जब किसी वर्ण की बार – बार आवर्ती हो तब जो चमत्कार होता है उसे अनुप्रास अलंकार कहते है। जैसे :- जन रंजन मंजन दनुज मनुज रूप सुर भूप। विश्व बदर इव धृत उदर जोवत सोवत सूप।। अनुप्रास के भेद :- छेकानुप्रास अलंकार वृत्यानुप्रास अलंकार लाटानुप्रास अलंकार अन्त्यानुप्रास अलंकार श्रुत्यानुप्रास अलंकार ★ यमक अलंकार :- यमक शब्द का अर्थ होता है – दो। जब एक ही शब्द ज्यादा बार प्रयोग हो पर हर बार अर्थ अलग-अलग आये वहाँ पर यमक अलंकार होता है। जैसे :- कनक कनक ते सौगुनी , मादकता अधिकाय। वा खाये बौराए नर , वा पाये बौराये। ★ पुनरुक्ति अलंकार क्या है :- पुनरुक्ति अलंकार दो शब्दों से मिलकर बना है – पुन: +उक्ति। जब कोई शब्द दो बार दोहराया जाता है वहाँ पर पुनरुक्ति अलंकार होता है। ★ विप्सा अलंकार :- जब आदर, हर्ष, शोक, विस्मयादिबोधक आदि भावों को प्रभावशाली रूप से व्यक्त करने के लिए शब्दों की पुनरावृत्ति को ही विप्सा अलंकार कहते है। जैसे :- मोहि-मोहि मोहन को मन भयो राधामय। राधा मन मोहि-मोहि मोहन मयी-मयी।। ★ वक्रोक्ति अलंकार:- जहाँ पर वक्ता के द्वारा बोले गए शब्दों का श्रोता अलग अर्थ निकाले उसे वक्रोक्ति अलंकार कहते है। ★ श्लेष अलंकार :- जहाँ पर कोई एक शब्द एक ही बार आये पर उसके अर्थ अलग अलग निकलें वहाँ पर श्लेष अलंकार होता है। जैसे :- रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून। पानी गए न उबरै मोती मानस चून।।


2. अर्थालंकार

जहाँ पर अर्थ के माध्यम से काव्य में चमत्कार होता हो वहाँ अर्थालंकार होता है। अर्थालंकार के भेद :- उपमा अलंकार रूपक अलंकार उत्प्रेक्षा अलंकार द्रष्टान्त अलंकार संदेह अलंकार अतिश्योक्ति अलंकार उपमेयोपमा अलंकार प्रतीप अलंकार अनन्वय अलंकार भ्रांतिमान अलंकार दीपक अलंकार अपहृति अलंकार व्यतिरेक अलंकार विभावना अलंकार विशेषोक्ति अलंकार अर्थान्तरन्यास अलंकार उल्लेख अलंकार विरोधाभाष अलंकार असंगति अलंकार मानवीकरण अलंकार अन्योक्ति अलंकार काव्यलिंग अलंकार स्वभावोती अलंकार 1. उपमा अलंकार :- उपमा शब्द का अर्थ होता है – तुलना। जब किसी व्यक्ति या वस्तु की तुलना किसी दूसरे यक्ति या वस्तु से की जाए वहाँ पर उपमा अलंकार होता है। जैसे :- सागर -सा गंभीर ह्रदय हो , गिरी -सा ऊँचा हो जिसका मन। उपमा अलंकार के अंग :- उपमेय उपमान वाचक शब्द साधारण धर्म 1. उपमेय :- उपमेय का अर्थ होता है – उपमा देने के योग्य। अगर जिस वस्तु की समानता किसी दूसरी वस्तु से की जाये वहाँ पर उपमेय होता है। 2.उपमान :- उपमेय की उपमा जिससे दी जाती है उसे उपमान कहते हैं। अथार्त उपमेय की जिस के साथ समानता बताई जाती है उसे उपमान कहते हैं। 3. वाचक शब्द :- जब उपमेय और उपमान में समानता दिखाई जाती है तब जिस शब्द का प्रयोग किया जाता है उसे वाचक शब्द कहते हैं। 4. साधारण धर्म :- दो वस्तुओं के बीच समानता दिखाने के लिए जब किसी ऐसे गुण या धर्म की मदद ली जाती है जो दोनों में वर्तमान स्थिति में हो उसी गुण या धर्म को साधारण धर्म कहते हैं। उपमा अलंकार के भेद :- पूर्णोपमा अलंकार लुप्तोपमा अलंकार 1. पूर्णोपमा अलंकार :- इसमें उपमा के सभी अंग होते हैं – उपमेय , उपमान , वाचक शब्द , साधारण धर्म आदि अंग होते हैं वहाँ पर पूर्णोपमा अलंकार होता है। जैसे :- सागर -सा गंभीर ह्रदय हो , गिरी -सा ऊँचा हो जिसका मन। 2.लुप्तोपमा अलंकार :- इसमें उपमा के चारों अगों में से यदि एक या दो का या फिर तीन का न होना पाया जाए वहाँ पर लुप्तोपमा अलंकार होता है। जैसे :- कल्पना सी अतिशय कोमल। जैसा हम देख सकते हैं कि इसमें उपमेय नहीं है तो इसलिए यह लुप्तोपमा का उदहारण है। 2. रूपक अलंकार :- जहाँ पर उपमेय और उपमान में कोई अंतर न दिखाई दे वहाँ रूपक अलंकार होता है अथार्त जहाँ पर उपमेय और उपमान के बीच के भेद को समाप्त करके उसे एक कर दिया जाता है वहाँ पर रूपक अलंकार होता है। जैसे :- ” उदित उदय गिरी मंच पर, रघुवर बाल पतंग। विगसे संत- सरोज सब, हरषे लोचन भ्रंग।।” रूपक अलंकार की निम्न बातें :- उपमेय को उपमान का रूप देना। वाचक शब्द का लोप होना। उपमेय का भी साथ में वर्णन होना। रूपक अलंकार के भेद :- सम रूपक अलंकार अधिक रूपक अलंकार न्यून रूपक अलंकार 1. सम रूपक अलंकार :- इसमें उपमेय और उपमान में समानता दिखाई जाती है वहाँ पर सम रूपक अलंकार होता है। जैसे :- बीती विभावरी जागरी . अम्बर – पनघट में डुबा रही , तारघट उषा – नागरी। 2.अधिक रूपक अलंकार :- जहाँ पर उपमेय में उपमान की तुलना में कुछ न्यूनता का बोध होता है वहाँ पर अधिक रूपक अलंकार होता है। 3. न्यून रूपक अलंकार :- इसमें उपमान की तुलना में उपमेय को न्यून दिखाया जाता है वहाँ पर न्यून रूपक अलंकार होता है। जैसे :- जनम सिन्धु विष बन्धु पुनि, दीन मलिन सकलंक सिय मुख समता पावकिमि चन्द्र बापुरो रंक।। 3. उत्प्रेक्षा अलंकार :- जहाँ पर उपमान के न होने पर उपमेय को ही उपमान मान लिया जाए। अथार्त जहाँ पर अप्रस्तुत को प्रस्तुत मान लिया जाए वहाँ पर उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। जैसे :- सखि सोहत गोपाल के, उर गुंजन की माल बाहर सोहत मनु पिये, दावानल की ज्वाल।। उत्प्रेक्षा अलंकार के भेद :- वस्तुप्रेक्षा अलंकार हेतुप्रेक्षा अलंकार फलोत्प्रेक्षा अलंकार 1. वस्तुप्रेक्षा अलंकार :- जहाँ पर प्रस्तुत में अप्रस्तुत की संभावना दिखाई जाए वहाँ पर वस्तुप्रेक्षा अलंकार होता है। जैसे :- ” सखि सोहत गोपाल के, उर गुंजन की माल। बाहर लसत मनो पिये, दावानल की ज्वाल।।” 2. हेतुप्रेक्षा अलंकार :- जहाँ अहेतु में हेतु की सम्भावना देखी जाती है। अथार्त वास्तविक कारण को छोडकर अन्य हेतु को मान लिया जाए वहाँ हेतुप्रेक्षा अलंकार होता है। 3. फलोत्प्रेक्षा अलंकार :- इसमें वास्तविक फल के न होने पर भी उसी को फल मान लिया जाता है वहाँ पर फलोत्प्रेक्षा अलंकार होता है। जैसे :- खंजरीर नहीं लखि परत कुछ दिन साँची बात। बाल द्रगन सम हीन को करन मनो तप जात।। 4. दृष्टान्त अलंकार :- जहाँ दो सामान्य या दोनों विशेष वाक्यों में बिम्ब-प्रतिबिम्ब भाव होता हो वहाँ पर दृष्टान्त अलंकार होता है। इस अलंकार में उपमेय रूप में कहीं गई बात से मिलती -जुलती बात उपमान रूप में दुसरे वाक्य में होती है। यह अलंकार उभयालंकार का भी एक अंग है। जैसे :- ‘ एक म्यान में दो तलवारें, कभी नहीं रह सकती हैं। किसी और पर प्रेम नारियाँ, पति का क्या सह सकती है।। 5.संदेह अलंकार :- जब उपमेय और उपमान में समता देखकर यह निश्चय नहीं हो पाता कि उपमान वास्तव में उपमेय है या नहीं। जब यह दुविधा बनती है , तब संदेह अलंकार होता है अथार्त जहाँ पर किसी व्यक्ति या वस्तु को देखकर संशय बना रहे वहाँ संदेह अलंकार होता है। यह अलंकार उभयालंकार का भी एक अंग है। जैसे :- यह काया है या शेष उसी की छाया, क्षण भर उनकी कुछ नहीं समझ में आया। संदेह अलंकार की मुख्य बातें :- विषय का अनिश्चित ज्ञान। यह अनिश्चित समानता पर निर्भर हो। अनिश्चय का चमत्कारपूर्ण वर्णन हो। 6. अतिश्योक्ति अलंकार :- जब किसी व्यक्ति या वस्तु का वर्णन करने में लोक समाज की सीमा या मर्यादा टूट जाये उसे अतिश्योक्ति अलंकार कहते हैं। जैसे :-हनुमान की पूंछ में लगन न पायी आगि। सगरी लंका जल गई , गये निसाचर भागि। 7. उपमेयोपमा अलंकार :- इस अलंकार में उपमेय और उपमान को परस्पर उपमान और उपमेय बनाने की कोशिश की जाती है इसमें उपमेय और उपमान की एक दूसरे से उपमा दी जाती है। जैसे :- तौ मुख सोहत है ससि सो अरु सोहत है ससि तो मुख जैसो। 8.प्रतीप अलंकार :- इसका अर्थ होता है उल्टा। उपमा के अंगों में उल्ट – फेर करने से अथार्त उपमेय को उपमान के समान न कहकर उलट कर उपमान को ही उपमेय कहा जाता है वहाँ प्रतीप अलंकार होता है। इस अलंकार में दो वाक्य होते हैं एक उपमेय वाक्य और एक उपमान वाक्य। लेकिन इन दोनों वाक्यों में सदृश्य का साफ कथन नहीं होता , वः व्यंजित रहता है। इन दोनों में साधारण धर्म एक ही होता है परन्तु उसे अलग-अलग ढंग से कहा जाता है। जैसे :- ” नेत्र के समान कमल है।” 9.अनन्वय अलंकार :- जब उपमेय की समता में कोई उपमान नहीं आता और कहा जाता है कि उसके समान वही है , तब अनन्वय अलंकार होता है। जैसे :- ” यद्यपि अति आरत – मारत है. भारत के सम भारत है। 10. भ्रांतिमान अलंकार :- जब उपमेय में उपमान के होने का भ्रम हो जाये वहाँ पर भ्रांतिमान अलंकार होता है अथार्त जहाँ उपमान और उपमेय दोनों को एक साथ देखने पर उपमान का निश्चयात्मक भ्रम हो जाये मतलब जहाँ एक वस्तु को देखने पर दूसरी वस्तु का भ्रम हो जाए वहाँ भ्रांतिमान अलंकार होता है। यह अलंकार उभयालंकार का भी अंग माना जाता है। जैसे :- पायें महावर देन को नाईन बैठी आय । फिरि-फिरि जानि महावरी, एडी भीड़त जाये।। 11.दीपक अलंकार :- जहाँ पर प्रस्तुत और अप्रस्तुत का एक ही धर्म स्थापित किया जाता है वहाँ पर दीपक अलंकार होता है। जैसे :- चंचल निशि उदवस रहें, करत प्रात वसिराज। अरविंदन में इंदिरा, सुन्दरि नैनन लाज।। 12. अपहृति अलंकार :- अपहृति का अर्थ होता है छिपाव। जब किसी सत्य बात या वस्तु को छिपाकर उसके स्थान पर किसी झूठी वस्तु की स्थापना की जाती है वहाँ अपहृति अलंकार होता है। यह अलंकार उभयालंकार का भी एक अंग है। जैसे :- ” सुनहु नाथ रघुवीर कृपाला , बन्धु न होय मोर यह काला।” 13. व्यतिरेक अलंकार :- व्यतिरेक का शाब्दिक अर्थ होता है आधिक्य। व्यतिरेक में कारण का होना जरुरी है। अत: जहाँ उपमान की अपेक्षा अधिक गुण होने के कारण उपमेय का उत्कर्ष हो वहाँ पर व्यतिरेक अलंकार होता है। जैसे :- का सरवरि तेहिं देउं मयंकू। चांद कलंकी वह निकलंकू।। मुख की समानता चन्द्रमा से कैसे दूँ? 14. विभावना अलंकार :- जहाँ पर कारण के न होते हुए भी कार्य का हुआ जाना पाया जाए वहाँ पर विभावना अलंकार होता है। जैसे :- बिनु पग चलै सुनै बिनु काना। कर बिनु कर्म करै विधि नाना। आनन रहित सकल रस भोगी। बिनु वाणी वक्ता बड़ जोगी। 15.विशेषोक्ति अलंकार :- काव्य में जहाँ कार्य सिद्धि के समस्त कारणों के विद्यमान रहते हुए भी कार्य न हो वहाँ पर विशेषोक्ति अलंकार होता है। जैसे :- नेह न नैनन को कछु, उपजी बड़ी बलाय। नीर भरे नित-प्रति रहें, तऊ न प्यास बुझाई।। 16.अर्थान्तरन्यास अलंकार :- जब किसी सामान्य कथन से विशेष कथन का अथवा विशेष कथन से सामान्य कथन का समर्थन किया जाये वहाँ अर्थान्तरन्यास अलंकार होता है। जैसे :- बड़े न हूजे गुनन बिनु, बिरद बडाई पाए। कहत धतूरे सों कनक, गहनो गढ़ो न जाए।। 17. उल्लेख अलंकार :- जहाँ पर किसी एक वस्तु को अनेक रूपों में ग्रहण किया जाए , तो उसके अलग-अलग भागों में बटने को उल्लेख अलंकार कहते हैं। अथार्त जब किसी एक वस्तु को अनेक प्रकार से बताया जाये वहाँ पर उल्लेख अलंकार होता है। जैसे :- विन्दु में थीं तुम सिन्धु अनन्त एक सुर में समस्त संगीत। 18. विरोधाभाष अलंकार :- जब किसी वस्तु का वर्णन करने पर विरोध न होते हुए भी विरोध का आभाष हो वहाँ पर विरोधाभास अलंकार होता है। जैसे :- ‘ आग हूँ जिससे ढुलकते बिंदु हिमजल के। शून्य हूँ जिसमें बिछे हैं पांवड़े पलकें।’ 19. असंगति अलंकार :- जहाँ आपतात: विरोध दृष्टिगत होते हुए, कार्य और कारण का वैयाधिकरन्य रणित हो वहाँ पर असंगति अलंकार होता है। जैसे :- ” ह्रदय घाव मेरे पीर रघुवीरै।” 20. मानवीकरण अलंकार :- जहाँ पर काव्य में जड़ में चेतन का आरोप होता है वहाँ पर मानवीकरण अलंकार होता है अथार्त जहाँ जड़ प्रकृति पर मानवीय भावनाओं और क्रियांओं का आरोप हो वहाँ पर मानवीकरण अलंकार होता है।जैसे :-बीती विभावरी जागरी , अम्बर पनघट में डुबो रही तास घट उषा नगरी। 21. अन्योक्ति अलंकार :- जहाँ पर किसी उक्ति के माध्यम से किसी अन्य को कोई बात कही जाए वहाँ पर अन्योक्ति अलंकार होता है। जैसे :-फूलों के आस- पास रहते हैं , फिर भी काँटे उदास रहते हैं। 22. काव्यलिंग अलंकार :- जहाँ पर किसी युक्ति से समर्थित की गयी बात को काव्यलिंग अलंकार कहते हैं अथार्त जहाँ पर किसी बात के समर्थन में कोई -न -कोई युक्ति या कारण जरुर दिया जाता है। जैसे :- कनक कनक ते सौगुनी, मादकता अधिकाय। उहि खाय बौरात नर, इहि पाए बौराए।। 23. स्वभावोक्ति अलंकार :- किसी वस्तु के स्वाभाविक वर्णन को स्वभावोक्ति अलंकार कहते हैं। जैसे :- सीस मुकुट कटी काछनी , कर मुरली उर माल। इहि बानिक मो मन बसौ , सदा बिहारीलाल।।


3. उभयालंकार

जो अलंकार शब्द और अर्थ दोनों पर आधारित रहकर दोनों को चमत्कारी करते हैं वहाँ उभयालंकार होता है। जैसे :- ‘ कजरारी अंखियन में कजरारी न लखाय।’


Samanya Hindi | Hindi Grammar GK | हिन्दी व्याकरण सामान्य ज्ञान प्रश्न उत्तर Part-1

हिन्दी व्याकरण 
सामान्य ज्ञान प्रश्न उत्तर

Samanya Hindi | Hindi Grammar GK

Part-1


बार - बार पूछे जाने वाले सवाल


महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर - 1



प्रश्न :- ‘अतीत के चलचित्र’ के रचयिता कौन हैं? उत्तर :- महादेवी वर्मा प्रश्न :- ‘अशोक के फूल’ (निबंध सग्रह) के रचनाकार कौन हैं? उत्तर :- हज़ारी प्रसाद द्विवेदी प्रश्न :- ‘अष्टछाप’ के सर्वश्रेष्ठ भक्त कवि कौन हैं? उत्तर :- सूरदास प्रश्न :- ‘आँसू’ (काव्य) के रचयिता कौन हैं? उत्तर :- जयशंकर प्रसाद प्रश्न :- ‘एक नार पिया को भानी। तन वाको सगरा ज्यों पानी।’ यह पंक्ति किस भाषा की है? उत्तर :- ब्रजभाषा प्रश्न :- ‘कामायनी’ किस प्रकार का ग्रंथ है? उत्तर :- महाकाव्य प्रश्न :- ‘गागर में सागर’ भरने का कार्य किस कवि ने किया है? उत्तर :- बिहारीलाल प्रश्न :- ‘गाथा’ (गाहा) कहने से किस लोक प्रचलित काव्यभाषा का बोध होता है? उत्तर :- प्राकृत प्रश्न :- ‘घनिष्ठ’ की शुद्ध उत्तरावस्था क्या है? उत्तर :- घनिष्ठतर प्रश्न :- ‘चारु’ शब्द की शुद्ध भावात्मक संज्ञा क्या है? उत्तर :- चारुता प्रश्न :- ‘चिंतामणि’ के रचयिता कौन हैं? उत्तर :- रामचन्द्र शुक्ल प्रश्न :- ‘जो अपनी जान खपाते हैं, उनका हक उन लोगों से ज़्यादा है, जो केवल रुपया लगाते हैं।’ यह कथन ‘गोदान’ के किस पात्र द्वारा कहा गया है? उत्तर :- महतो प्रश्न :- ‘जो जिण सासण भाषियउ सो मई कहियउ सारु। जो पालइ सइ भाउ करि सो तरि पावइ पारु॥’ इस दोहे के रचनाकार का नाम क्या है? उत्तर :- देवसेन प्रश्न :- ‘झरना’ (काव्य संग्रह) के रचयिता कौन हैं? उत्तर :- जयशंकर प्रसाद प्रश्न :- ‘दुरित, दुःख, दैन्य न थे जब ज्ञात, अपरिचित जरा-मरण-भ्रू पात।।’ इस पंक्ति के रचनाकार कौन हैं? उत्तर :- सुमित्रानंदन पंत प्रश्न :- ‘देखन जौ पाऊँ तौ पठाऊँ जमलोक हाथ, दूजौ न लगाऊँ, वार करौ एक करको।’ ये पंक्तियाँ किस कवि द्वारा सृजित हैं? उत्तर :- नाभादास प्रश्न :- ‘दोहाकोश’ के रचयिता कौन हैं? उत्तर :- सरहपा प्रश्न :- ‘नमक का दरोगा’ कहानी के लेखक कौन हैं? उत्तर :- प्रेमचंद प्रश्न :- ‘नागनंदा’ नामक संस्कृतनटक की रचना किस शासक ने की? उत्तर :- हर्षवर्धन ने प्रश्न :- ‘नाट्यशास्त्र’ की रचना किसने की? उत्तर :- भरत मुनि प्रश्न :- ‘निराला के राम तुलसीदास के राम से भिन्न और भवभूति के राम के निकट हैं।’ यह कथन किस हिन्दी आलोचक का है? उत्तर :- डॉ. रामविलास शर्मा प्रश्न :- ‘निरुत्तर’ शब्द का शुद्ध सन्धि विच्छेद क्या है? उत्तर :- निः+उत्तर प्रश्न :- ‘निशा -निमंत्रण’ के रचनाकार कौन हैं? उत्तर :- हरिवंश राय बच्चन प्रश्न :- ‘पंचवटी’ कौन-सा समास है? उत्तर :- द्विगु प्रश्न :- ‘पद्मावत’ किसकी रचना है? उत्तर :- मलिक मुहम्मद जायसी


महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर - 2

प्रश्न :- ‘परहित सरिस धर्म नहि भाई, परपीड़ा सम नहिं अधमाई’। इस पंक्ति के रचयिता कौन हैं? उत्तर :- तुलसीदास प्रश्न :- ‘पल्लव’ के रचयिता कौन हैं? उत्तर :- सुमित्रानंदन पंत प्रश्न :- ‘पवित्रता की माप है मलिनता, सुख का आलोचक है दुःख, पुण्य की कसौटी है पाप।’ यह कथन ‘स्कन्दगुप्त’ नाटक के किस पात्र का है? उत्तर :- देवसेना प्रश्न :- ‘प्रगतिवाद उपयोगितावाद का दूसरा नाम है।’ यह कथन किसका है? उत्तर :- नन्द दुलारे बाजपेयी प्रश्न :- ‘प्रभातफेरी’ काव्य के रचनाकार कौन हैं? उत्तर :- नरेन्द्र शर्मा प्रश्न :- ‘प्रिय दर्शिका’ नामक संस्कृत ग्रंथ की रचना किस शासक ने की? उत्तर :- हर्षवर्धन ने प्रश्न :- ‘प्रेमसागर’ के रचनाकार कौन हैं? उत्तर :- लल्लू लालजी प्रश्न :- प्रश्न :- ‘बाँगरू’ बोली का किस बोली से निकट सम्बन्ध है? उत्तर :- खड़ीबोली प्रश्न :- ‘बैताल पच्चीसी’ के रचनाकार कौन हैं? उत्तर :- सूरति मिश्र प्रश्न :- ‘भक्तमाल” भक्तिकाल के कवियों की प्राथमिक जानकारी देता है, इसके रचयिता कौन थे? उत्तर :- नाभादास प्रश्न :- ‘भरहूत स्तूप’ का निर्माण किसने कराया? उत्तर :- पुष्यमित्र शुंग ने प्रश्न :- ‘भारत भारती’ (काव्य) के रचनाकार कौन हैं? उत्तर :- मैथिलीशरण गुप्त प्रश्न :- ‘मनुष्य के आचरण के प्रवर्तक भाव या मनोविकार ही होते हैं, बुद्धि नहीं।’ यह कथन किसका है? उत्तर :- रामचन्द्र शुक्ल का प्रश्न :- ‘रस मीमांसा’ रस-सिद्धांत से सम्बन्धित पुस्तक है, इस पुस्तक के लेखक कौन हैं? उत्तर :- आचार्य रामचन्द्र शुक्ल प्रश्न :- ‘रानी केतकी की कहानी’ की भाषा को क्या कहा जाता है? उत्तर :- खड़ीबोली प्रश्न :- रामचरितमानस’ में कितने काण्ड हैं? उत्तर :- 7 प्रश्न :- ‘रामचरितमानस’ में प्रधान रस के रूप में किस रस को मान्यता मिली है? उत्तर :- भक्ति रस प्रश्न :- ‘लहरें व्योम चूमती उठती। चपलाएँ असंख्य नचती।’ पंक्ति जयशंकर प्रसाद के किस रचना का अंश है? उत्तर :- कामायनी प्रश्न :- ‘शिवा बावनी’ के रचनाकार कौन हैं? उत्तर :- भूषण प्रश्न :- ‘संस्कृति के चार अध्याय’ किसकी रचना है? उत्तर :- रामधारी सिंह ‘दिनकर’ प्रश्न :- ‘साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप’। इस पंक्ति के रचयिता कौन हैं? उत्तर :- कबीर प्रश्न :- ‘सुन्दर परम किसोर बयक्रम चंचल नयन बिसाल। कर मुरली सिर मोरपंख पीतांबर उर बनमाल॥ ये पंक्तियाँ किस रचनाकार की हैं? उत्तर :- सूरदास प्रश्न :- ‘सुहाग के नूपुर’ के रचयिता कौन हैं? उत्तर :- अमृतलाल नागर प्रश्न :- ‘हरिश्चन्द्री हिन्दी’ शब्द का प्रयोग किस इतिहासकार ने अपने इतिहास ग्रंथ में किया है? उत्तर :- रामचन्द्र शुक्ल प्रश्न :- ‘हितोपदेश’ की रचना किसने की? उत्तर :- नारायण पंडित



महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर - 3

‘हिन्दी साहित्य का अतीत: भाग- एक’ के लेखक का क्या नाम है? उत्तर :- डॉ. विश्वनाथ प्रसाद मिश्र प्रश्न :- ‘कनक-कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय’ में कौन-सा अलंकार है? उत्तर :- यमक प्रश्न :- ‘पृथ्वीराज रासो’ के रचनाकार कौन हैं? उत्तर :- चन्दबरदाई प्रश्न :- अंकोरवाट कहाँ स्थित है? उत्तर :- कंबोडिया में प्रश्न :- हिन्दी खड़ी बोली के जन्मदाता कौन है? उत्तर :- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र प्रश्न :- हिन्दी गद्य का जन्मदाता किसको माना जाता है? उत्तर :- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र प्रश्न :- हिन्दी गध के प्रतिष्ठापक कौन है? उत्तर :- आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी प्रश्न :- हिन्दी दिवस किस तिथि को मनाया जाता है? उत्तर :- 14 सितम्बर प्रश्न :- हिन्दी भाषा का पहला समाचार-पत्र ‘उदंत मार्तण्ड’ किस सन् में प्रकाशित हुआ था? उत्तर :- 1826 प्रश्न :- हिन्दी भाषा का प्रथम महाकाव्य किसे कहा जाता है? उत्तर :- पृथ्वीराज रासो (चन्दबरदाई की रचना) प्रश्न :- हिन्दी भाषा की बोलियों के आधार पर छत्तीसगढ़ी बोली क्या है? उत्तर :- पूर्वी हिन्दी प्रश्न :- हिन्दी में आशुलिपि के जन्मदाता कौन हैं? उत्तर :- राधेलाल द्विवेदी प्रश्न :- हिन्दी विषय पर प्रथम ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले कौन थे? उत्तर :- सुमित्रानंदन पंत प्रश्न :- हिन्दी साहित्य का अतीत: भाग-एक के लेखक का नाम क्या है? उत्तर :- डॉ. विश्वनाथ प्रसाद मिश्र प्रश्न :- हिन्दी साहित्य की प्रथम कहानी कौनसी है? उत्तर :- इन्दुमती प्रश्न :- हिन्दी साहित्य के आरंभिक काल को आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने क्या कहा है? उत्तर :- वीरगाथा काल प्रश्न :- हिन्दी साहित्य के इतिहास के सर्वप्रथम लेखक का नाम क्या है? उत्तर :- गार्सा द तासी प्रश्न :- ‘हिमालय के आँगन में उसे प्रथम किरणों का दे उपहार, उषा ने हँस अभिवादन किया और पहनाया हीरे का हार।’ इस पंक्तियों के रचयिता कौन हैं? उत्तर :- जयशंकर प्रसाद प्रश्न :- संविधान की आठवीं अनुसूची के अनुसार कितनी भाषाओं को राजभाषा के रूप में सांविधानिक मान्यता प्राप्त हैं? उत्तर :- 22 भाषाएं प्रश्न :- संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल की गई चार नई भाषाएँ कौनसी हैं? उत्तर :- संथाली, मैथिली,बोडो और डोगरी प्रश्न :- संविधान के किस अनुच्छेद के अनुसार हिन्दी भारत की राजभाषा है? उत्तर :- अनुच्छेद 343 (1) प्रश्न :- ‘संसद से सड़क तक’ (काव्य) के रचनाकार कौन हैं? उत्तर :- सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ प्रश्न :- संस्कृत से सर्वांधिक प्रभावित द्रविड़ भाषा कौनसी है? उत्तर :- तेलुगु प्रश्न :- ‘संस्कृति के चार अध्याय’ किसकी रचना है? उत्तर :- रामधारी सिंह ‘दिनकर’ प्रश्न :- सखि वे मुझसे कह कर जाते। इस पंक्तियों के रचयिता कौन हैं? उत्तर :- मैथली शरण गुप्त



महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर - 4

प्रश्न :- सबसे पहले अपनी आत्मकथा हिंदी में किसने लिखी? उत्तर :- राजेन्द्र प्रसाद प्रश्न :- सर्वप्रथम किस आलोचक ने अपने किस ग्रंथ में देव बड़े हैं कि बिहारी विवाद को जन्म दिया? उत्तर :- मिश्रबंधु : हिन्दी नवरत्न प्रश्न :- सर्वप्रथम किस विदेशी यात्री ने भारत यात्री की? उत्तर :- फाह्यान ने प्रश्न :- सर्वप्रथम भारत को इंडिया किसने कहा? उत्तर :- यूनानवासियों ने प्रश्न :- सर्वप्रथम भारतवर्ष का जिक्र किस अभिलेखा में मिला है? उत्तर :- हाथी गुंफा अभिलेख में प्रश्न :- साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। इस पंक्ति के रचयिता कौन हैं? उत्तर :- कबीर प्रश्न :- किस छायावादी कवि ने संवाद शैली का सर्वाधिक उपयोग किया है? उत्तर :- जयशंकर प्रसाद प्रश्न :- किस देश में अधिकतम संख्या में भाषाएँ बोली जाती हैं? उत्तर :- भारत प्रश्न :- रामधारी सिंह ‘दिनकर’ किस रस के कवि माने जाते हैं? उत्तर :- वीर रस प्रश्न :- रामधारी सिंह ‘दिनकर’ को किस रचना के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था? उत्तर :- उर्वशी प्रश्न :- रीतिकाल का वह कौन-सा कवि है, जो अपनी मात्र एक कृति से हिन्दी साहित्य में अमर हो गया? उत्तर :- बिहारी प्रश्न :- रेशम बनाने की तकनीक का अविष्कार सर्वप्रथम किस देश में हुआ? उत्तर :- चीन में प्रश्न :- लाल पीला होने का क्या अर्थ है? उत्तर :- क्रोध करना प्रश्न :- ले चल मुझे भुलावा देकर, मेरे नाविक धीरे-धीरे। इस पंक्ति के रचयिता कौन हैं? उत्तर :- जयशंकर प्रसाद प्रश्न :- लोग हैं लागि कवित्त बनावत, मोहिं तो मेरे कवित्त बनावत। इस पंक्ति के रचयिता कौन हैं? उत्तर :- घनानन्द प्रश्न :- ‘एक भारतीय आत्मा’ किसे कहा जाता है? उत्तर :- माखनलाल चतुर्वेदी प्रश्न :- ऑस्ट्रिक भाषा समूह की भाषाओं को बोलने वालों को क्या कहा जाता है? उत्तर :- किरात प्रश्न :- कटकटान कपि कुंजर भारी। दुहु भुजदंड तमकि महिमारी।। डोलत धरनि सभापद खसे चले भाजि भय मारूत ग्रसे।। प्रस्तुत पंक्तियों के प्रश्न :- रचयिता कौन हैं? उत्तर :- तुलसीदास प्रश्न :- ‘कठिन काव्य का प्रेत’ किस कवि को कहा जाता हैं? उत्तर :- केशवदास को प्रश्न :- कथा सम्राट किसे कहा जाता है? उत्तर :- प्रेमचंद प्रश्न :- कबीरदास की भाषा क्या थी? उत्तर :- सधुक्कड़ी प्रश्न :- कलम का सिपाही किसे कहा जाता है? उत्तर :- मुंशी प्रेमचंद प्रश्न :- ‘कलम की सिपाही’ क्या है? उत्तर :- जीवनी प्रश्न :- कवि कालिदास की ‘अभिज्ञान शाकुन्तलम’ का हिन्दी अनुवाद किसने किया? उत्तर :- राजा लक्ष्मण सिंह प्रश्न :- ‘कस्तूरी कुंडल बसै’ किसकी आत्मकथा है? उत्तर :- मैत्रेयी पुष्पा की



महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर - 5

हिन्दी साहित्य के इतिहास के सर्वप्रथम लेखक का नाम क्या है उत्तर :- गार्सा द तासी प्रश्न :- 'पद्मावत' किसकी रचना है उत्तर :- मलिक मुहम्मद जायसी प्रश्न :- 'बैताल पच्चीसी' के रचनाकार हैं उत्तर :- सूरति मिश्र प्रश्न :- 'लहरें व्योम चूमती उठती। चपलाएँ असंख्य नचती।' पंक्ति जयशंकर प्रसाद के किस रचना का अंश है उत्तर :- कामायनी प्रश्न :- किस छायावादी कवि ने संवाद शैली का सर्वाधिक उपयोग किया है उत्तर :- जयशंकर प्रसाद प्रश्न :- व्यवस्थाप्रियता और विद्रोह का विलक्षण संयोग किस प्रयोगवादी कवि में सबसे अधिक मिलता है उत्तर :- अज्ञेय में प्रश्न :- भारतेन्दु कृत 'भारत दुर्दशा' किस साहित्य रूप का हिस्सा है उत्तर :- नाटक साहित्य प्रश्न :- 'जो अपनी जान खपाते हैं, उनका हक उन लोगों से ज़्यादा है, जो केवल रुपया लगाते हैं।' यह कथन 'गोदान' के किस पात्र द्वारा कहा गया है उत्तर :- महतो प्रश्न :- 'पवित्रता की माप है मलिनता, सुख का आलोचक है दुःख, पुण्य की कसौटी है पाप।' यह कथन 'स्कन्दगुप्त' नाटक के किस पात्र का है उत्तर :- देवसेना प्रश्न :- 'दोहाकोश' के रचयिता हैं उत्तर :- सरहपा प्रश्न :- 'प्रेमसागर' के रचनाकार हैं उत्तर :- लल्लू लालजी प्रश्न :- 'यह युग (भारतेन्दु) बच्चे के समान हँसता-खेलता आया था, जिसमें बच्चों की सी निश्छलता, अक्खड़पन, सरलता और तन्मयता थी।' यह कथन किस आलोचक का है उत्तर :- आचार्य रामचन्द्र शुक्ल प्रश्न :- मनुष्य से बड़ा है उसका अपना विश्वास और उसका ही रचा हुआ विधान। अपने विश्वास और विधान के सम्मुख ही मनुष्य विवशता अनुभव करता है और स्वयं ही वह उसे बदल भी देता है॥' यह कथन किस उपन्यासकार ने लिखा है उत्तर :- हज़ारी प्रसाद द्विवेदी प्रश्न :- वीरों का कैसा हो वसंत कविता के रचयिता हैं उत्तर :- सुभद्रा कुमारी चौहान प्रश्न :- 'आँसू' (काव्य) के रचयिता हैं उत्तर :- जयशंकर प्रसाद प्रश्न :- सही वर्तनी का चयन कीजिए उत्तर :- परीक्षा प्रश्न :- 'पंचवटी' कौन-सा समास है उत्तर :- द्विगु प्रश्न :- 'निरुत्तर' शब्द का शुद्ध सन्धि विच्छेद है उत्तर :- निः + उत्तर प्रश्न :- 'रामचरितमानस' में कितने काण्ड हैं उत्तर :- (7) प्रश्न :- निम्नलिखित में से कौन सा एक व्यंग्य लेखक है उत्तर :- हरिशंकर परसाई प्रश्न :- शुद्ध शब्द क्या है उत्तर :- कवयित्री प्रश्न :- 'इतिहास' शब्द का शुद्ध विशेषण है- उत्तर :- ऐतिहासिक प्रश्न :- 'नवनीत' शब्द का सही अर्थ है- उत्तर :- मक्खन प्रश्न :- 'प्राचीन' का विलोम है- उत्तर :- अर्वाचीन प्रश्न :- 'मनुष्यता' का विपरीतार्थक है- उत्तर :- बर्बरता प्रश्न :- किस काल को स्वर्णकाल कहा जाता है उत्तर :- भक्ति काल प्रश्न :- सूरदास के गुरु कौन थे उत्तर :- बल्लभाचार्य प्रश्न :- 'जिसका जन्म न हो' एक शब्द बताएँ उत्तर :- अजन्मा प्रश्न :- कौन सा वाक्य शुद्ध है उत्तर :- रामचरितमानस' एक धार्मिक ग्रंथ है प्रश्न :- "कनक-कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय" में कौन-सा अलंकार है उत्तर :- यमक प्रश्न :- खड़ीबोली का अरबी-फ़ारसीमय रूप है उत्तर :- उर्दू भाषा प्रश्न :- हिन्दी भाषा का पहला समाचार-पत्र 'उदंत मार्तण्ड' किस सन् में प्रकाशित हुआ था उत्तर :- 1826 प्रश्न :- हिन्दी के किस समाचार-पत्र में 'खड़ीबोली' को 'मध्यदेशीय भाषा' कहा गया है उत्तर :- बनारस अखबार प्रश्न :- 'गाथा' (गाहा) कहने से किस लोक प्रचलित काव्यभाषा का बोध होता है उत्तर :- प्राकृत प्रश्न :- सिद्धों की उद्धृत रचनाओं की काव्य भाषा है उत्तर :- देशभाषा मिश्रित अपभ्रंश अर्थात् पुरानी हिन्दी प्रश्न :- अपभ्रंश भाषा के प्रथम व्याकरणाचार्य थे उत्तर :- हेमचन्द्र प्रश्न :- देवनागरी लिपि का विकास किस लिपि से हुआ है उत्तर :- ब्राह्मी लिपि प्रश्न :- द्रविड़ भाषाओं में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है उत्तर :- तेलुगु प्रश्न :- किस भाषा को द्रविड़ परिवार की सभी भाषाओं की जननी कहा जाता है उत्तर :- तमिल प्रश्न :- किस भाषा को भारतीय आर्य भाषाओं की जननी, भारतीय आर्य संस्कृति का आधार, देवभाषा आदि नामों से जाना जाता है उत्तर :- संस्कृत प्रश्न :- संस्कृत से सर्वांधिक प्रभावित द्रविड़ भाषा है उत्तर :- तेलुगु प्रश्न :- भाषा के सम्बन्ध में 'हिन्दी' शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया उत्तर :- अमीर ख़ुसरो प्रश्न :- भारतीय संविधान में हिनीधि को कहा गया है उत्तर :- राजभाषा प्रश्न :- राजभाषा आयोग के अध्यक्ष थे उत्तर :- बी.जी.खेर प्रश्न :- उर्दू किस भाषा का शब्द है उत्तर :- तुर्की प्रश्न :- देश में एकमात्र किस राज्य की राजभाषा अंग्रेज़ी है उत्तर :- नागालैंड प्रश्न :- बिहारी निम्नलिखित में से किस काल के कवि थे उत्तर :- रीति काल प्रश्न :- आचार्य रामचन्द्र शुक्ल कृत 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' की अधिकांश सामग्री पुस्तकाकार प्रकाशन के पूर्व 'हिन्दी शब्द- सागर' की भूमिका में छपी थी। इस भूमिका में उसका शीर्षक था उत्तर :- हिन्दी साहित्य का विकास प्रश्न :- अवधी भाषा के सर्वाधिक लोकप्रिय महाकाव्य का नाम है उत्तर :- रामचरितमानस प्रश्न :-"जिस कालखण्ड के भीतर किसी विशेष ढंग की रचनाओं की प्रचुरता दिखाई पड़ी है, वह एक अलग काल माना गया है और उसका नामकरण उन्हीं रचनाओं के अनुसार किया गया है" यह मान्यता किस इतिहासकार की है उत्तर :- आचार्य रामचन्द्र शुक्ल प्रश्न :- केरल राज्य की राजकीय भाषा है उत्तर :- मलयालम प्रश्न :- नागालैंड की राजकीय भाषा है उत्तर :- अंग्रेज़ी प्रश्न :- हिनीलख को राजकीय भाषा (कार्यालय की भाषा) कब घोषित किया गया उत्तर :- 26 जनवरी, 1965 प्रश्न :- निम्नलिखित में से कौन-सी भाषा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में नहीं दी गई है उत्तर :- अंग्रेज़ी प्रश्न :- कौन-सी भाषा ऑस्ट्रिक समूह से सम्बन्धित है उत्तर :- खासी प्रश्न :- निम्नलिखित भारतीय भाषाओं में कौन-सी भाषा द्रविड़ भाषा की उत्पत्ति नहीं है उत्तर :- मराठी प्रश्न :- निम्नलिखित में से किस देश में अधिकतम संख्या में भाषाएँ बोली जाती हैं उत्तर :- भारत प्रश्न :- अंगेलखज़ी भाषा को भारत में शिक्षा के माध्यम से आरंभ किया गया उत्तर :- लॉर्ड मैकाले द्वारा प्रश्न :- हिनीलख साहितयज के प्रारंभिक काल को आचारयर शुकलत ने क्या कहा है उत्तर :- वीरगाथा-काल प्रश्न :- भारत की प्राचीन भाषा है उत्तर :- संस्कृत प्रश्न :- आसमान पर चढ़ाने का अर्थ है- उत्तर :- अत्यधिक प्रशंसा करना प्रश्न :- वीरगाथा काल के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं- उत्तर :- चन्दबरदाई प्रश्न :- "पृथ्वीराज रासो" के रचनाकार हैं- उत्तर :- चन्दबरदाई प्रश्न :- कबीरदास की भाषा क्या थी उत्तर :- सधुक्कड़ी प्रश्न :- 'शिवा बावनी' के रचनाकार हैं- उत्तर :- भूषण प्रश्न :- बूँदी नरेश महाराज भावसिंह का आश्रित कवि निम्नलिखित में से कौन था उत्तर :- मतिराम प्रश्न :- भूषण का निम्नलिखित में से कौन सा लक्षण ग्रंथ है उत्तर :- शिवराज भूषण प्रश्न :- निम्नलिखित में से किस रचना की सर्वाधिक टीकाएँ लिखी गई हैं उत्तर :- बिहारी सतसई प्रश्न :- वीरगाथा काल के कवि नहीं हैं- उत्तर :- नामदेव प्रश्न :- हिन्दी कविता को छंदों की परिधि से मुक्त कराने वाले थे- उत्तर :- सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' प्रश्न :- 'पल्लव' के रचयिता हैं- उत्तर :- सुमित्रानंदन पंत प्रश्न :- 'चिंतामणि' के रचयिता हैं- उत्तर :- रामचन्द्र शुक्ल प्रश्न :- निम्नलिखित में से सबसे पहले अपनी आत्मकथा हिनी्ष में किसने लिखी उत्तर :- राजेन्द्र प्रसाद प्रश्न :- आंचलिक रचनाएँ किससे संबधित होती हैं उत्तर :- क्षेत्र विशेष से प्रश्न :- निर्गुण भक्ति काव्य का प्रमुख कवि है- उत्तर :- कबीरदास प्रश्न :- हिन्दी के सर्वप्रथम प्रकाशित पत्र का नाम क्या है उत्तर :- उतण्ड मार्तण्ड प्रश्न :- छायावाद के प्रवर्तक का नाम है- उत्तर :- जयशंकर प्रसाद' प्रश्न :- प्रगतिवाद उपयोगितावाद का दूसरा नाम है।' यह कथन किसका है उत्तर :- नन्द दुलारे बाजपेयी प्रश्न :- पेवामचनदव के अधूरे उपन्यास का नाम क्या है उत्तर :- मंगलसूत्र प्रश्न :- रामधारी सिंह 'दिनकर' को भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ था- उत्तर :- 'उर्वशी' पर प्रश्न :- 'सुहाग के नूपुर' के रचयिता हैं- उत्तर :- अमृतलाल नागर प्रश्न :- 'संस्कृति के चार अध्याय' किसकी रचना है उत्तर :- रामधारी सिंह 'दिनकर' प्रश्न :- 'अशोक के फूल' (निबंध सग्रह) के रचनाकार हैं- उत्तर :- हज़ारी प्रसाद द्विवेदी



महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर - 6

प्रश्न :- 'झरना' (काव्य संग्रह) के रचयिता हैं- उत्तर :- जयशंकर प्रसाद प्रश्न :- 'दुरित, दुःख, दैन्य न थे जब ज्ञात, अपरिचित जरा-मरण-भ्रू पात।।' पंक्ति के रचनाकार हैं उत्तर :- सुमित्रानंदन पंत प्रश्न :- 'निराला के राम तुलसीदास के राम से भिन्न और भवभूति के राम के निकट हैं।' यह कथन किस हिन्दी आलोचक का है उत्तर :- डॉ. रामविलास शर्मा प्रश्न :- 'राम की शक्तिपूजा' में निराला की इन दो कविताओं का सारतत्त्व समाहित है उत्तर :- जागो फिर एक बार और तुलसीदास प्रश्न :- 'भारत भारती' (काव्य) के रचनाकार हैं- उत्तर :- मैथिलीशरण गुप्त प्रश्न :- 'मनुष्य के आचरण के प्रवर्तक भाव या मनोविकार ही होते हैं, बुद्धि नहीं।' यह कथन है उत्तर :- रामचन्द्र शुक्ल का प्रश्न :- 'रस मीमांसा' रस-सिद्धांत से सम्बन्धित पुस्तक है, इस पुस्तक के लेखक हैं उत्तर :- आचार्य रामचन्द्र शुक्ल प्रश्न :- 'परहित सरिस धर्म नहि भाई, परपीड़ा सम नहिं अधमाई'। इस पंक्ति के रचयिता कौन हैं उत्तर :- तुलसीदास प्रश्न :- 'साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप'। इस पंक्ति के रचयिता कौन हैं उत्तर :- कबीर प्रश्न :- 'अष्टछाप' के सर्वश्रेष्ठ भक्त कवि कौन हैं उत्तर :- सूरदास प्रश्न :- भूषण किस रस के कवि हैं उत्तर :- वीर रस प्रश्न :- हिनीलस का आदि कवि किसे माना जाता है उत्तर :- स्वयंभू प्रश्न :- उपन्यास और कहानी का मूल अन्तर है, उसका - उत्तर :- विषय निरूपण प्रश्न :- हिनीलस पत्रिका 'कादम्बिनी' के संपादक कौन हैं उत्तर :- राजेन्द्र अवस्थी प्रश्न :- रामधारी सिंह 'दिनकर' किस रस के कवि माने जाते हैं उत्तर :- वीर रस प्रश्न :- सूर्यकांत त्रिपाठी निराला को कैसा कवि माना जाता है उत्तर :- क्रांतिकारी प्रश्न :- 'चारु' शब्द की शुद्ध भावात्मक संज्ञा है- उत्तर :- चारुता प्रश्न :- हिन्दी भाषा की बोलियों के आधार पर छती्कसगढ़ी बोली है- उत्तर :- पूर्वी हिन्दी प्रश्न :- 'घनिष्ठ' की शुद्ध उत्तरावस्था है- उत्तर :- घनिष्ठतर प्रश्न :- निम्नलिखित में कौन सा एक उपन्यास जैनेन्द्र द्वारा रचित है उत्तर :- परख प्रश्न :- 'कामायनी' किस प्रकार का ग्रंथ है उत्तर :- महाकाव्य प्रश्न :- 'गागर में सागर' भरने का कार्य किस कवि ने किया है उत्तर :- बिहारीलाल प्रश्न :- मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषाओं का स्थिति काल रहा है उत्तर :- 500 ई.पू. से 1000 ई.पू. प्रश्न :- 'प्राचीन देशभाषा' (पूर्व अपभ्रंश) को 'अपभ्रंश' तथा परवर्ती अर्थात् अग्रसरीभूत अपभ्रंश को 'अवहट्ठ' किस भाषा वैज्ञानिक ने कहा है उत्तर :- सुनीतिकुमार चटर्जी एवं सुकुमार सेन प्रश्न :- अर्द्धमागधी अपभ्रंश से इनमें से किस बोली का विकास हुआ है उत्तर :- बंगाली प्रश्न :- कामताप्रसाद गुरु का हिन्दी व्याकरण विषयक ग्रंथ, जो नागरी प्रचारिणी सभा, काशी से प्रकाशित हुआ था, उसका नाम था उत्तर :- हिन्दी व्याकरण प्रश्न :- देवनागरी लिपि है उत्तर :- अक्षरात्मक प्रश्न :- विद्यापति की उस प्रमुख रचना का नाम बताइए, जिसमें 'अवहट्ठ' भाषा का बहुतायत प्रयोग हुआ है उत्तर :- कीर्तिलता प्रश्न :- जॉर्ज ग्रियर्सन ने पश्चिमोत्तर समुदाय की भाषा को आधुनिक भारतीय आर्यभाषाओं की किस उपशाखा में रखा है उत्तर :- बाहरी उपशाखा प्रश्न :- उर्दू किस भाषा का मूल शब्द है उत्तर :- तुर्की भाषा प्रश्न :- 'साहित्य का इतिहास दर्शन' ग्रंथ के लेखक का नाम है उत्तर :- डॉ. नलिन विलोचन शर्मा प्रश्न :- जहाँ शब्दों, शब्दांशों या वाक्यांशों की आवृत्ति हो, किंतु उनके अर्थ भिन्न हों, वहाँ निम्न में से कौन-साअलंकार है उत्तर :- यमक प्रश्न :- गिला' कहानी के लेखक का नाम है उत्तर :- प्रेमचन्द्र प्रश्न :- 'गंगावतरण' काव्य के रचयिता हैं उत्तर :- जगन्नाथदास रत्नाकर प्रश्न :- छायावादी कवियों ने जब आध्यात्मिक प्रेम को अपनी कविताओं में व्यक्त किया तो ऐसी कविताओं को किस वाद के अंतर्गत रखा गया है उत्तर :- रहस्यवाद प्रश्न :- गोवा की स्वीकृत राजभाषा है उत्तर :- कोंकणी प्रश्न :- 'ध्रुव स्वामिनी' नाटक के रचयिता हैं उत्तर :- जयशंकर प्रसाद प्रश्न :- 'परिवर्तन' नामक कविता सर्वप्रथम सुमित्रानन्दन पंत के किस कविता संग्रह में संगृहीत हुई है उत्तर :- पल्लव प्रश्न :- भिखारीदास की रचना का नाम है उत्तर :- काव्य निर्णय प्रश्न :- उन्नीसवीं सदी की साहित्य- सर्जना का मूल हेतु है उत्तर :- पराधीनता का बोध प्रश्न :- 'यह प्रेम को पंथ कराल महा तरवारि की धार पै धावनो है', नामक पंक्ति किस कवि द्वारा सृजित है उत्तर :- बोधा प्रश्न :- आचार्य केशवदास को 'कठिन काव्य का प्रेत' किस आलोचक ने कहा है उत्तर :- आचार्य रामचन्द्र शुक्ल प्रश्न :- भक्तिकाल का एक कवि अवतारवाद और मूर्तिपूजा का विरोधी है. इसके बावज़ूद वह हिन्दुओं के जन्म-मृत्यु सम्बन्धी सिद्धांत को मानता है, ऐसा रचनाकार है उत्तर :- कबीर प्रश्न :- प्रथम सूफ़ी प्रेमाख्यानक काव्य के रचयिता हैं उत्तर :- मुल्ला दाऊद प्रश्न :- भक्तिकालीन कवियों में एक ऐसा ख्यातिलब्ध रचनाकार है जो अपने काव्य में लोकव्यापी प्रभाव वाले कर्म और लोकव्यापिनी दशाओं के वर्णन में माहिर है। ऐसे रचनाकार का नाम है उत्तर :- तुलसीदास प्रश्न :- 'जायसी -ग्रंथावली' के सम्पादक का नाम है उत्तर :- रामचन्द्र शुक्ल प्रश्न :- दोहा छन्द में श्रृंगारी रचना प्रस्तुत करने वालों में हिन्दी के सर्वाधिक ख्यातिलब्ध कवि हैं उत्तर :- बिहारी प्रश्न :- 'कंचन तन धन बरन बर रहयौ रंग मिलि रंग। जानी जाति सुबास ही केसरि लाई अंग॥' उपर्युक्त पंक्तियाँ किसकी हैं उत्तर :- बिहारी प्रश्न :- जलप्लावन भारतीय इतिहास की ऐसी प्राचीन घटना है जिसको आधार बनाकर छायावादी युग में एक महाकाव्य लिखा गया है। उसका नाम है उत्तर :- कामायनी प्रश्न :- शब्दार्थों सहित काव्यम् यह उक्ति किसकी है उत्तर :- भामह प्रश्न :- ढ़ाई आखर प्रेम के, पढ़ै सो पंडित होय॥ प्रस्तुत पंक्ति के रचयिता हैं उत्तर :- कबीर दास प्रश्न :- चौपाई के प्रत्येक चरण में मात्राएँ होती हैं उत्तर :- 16 प्रश्न :- 'संदेश रासक' के रचयिता हैं उत्तर :- अब्दुल रहमान प्रश्न :- 'साखी' के रचयिता हैं उत्तर :- कबीरदास प्रश्न :- लोगहिं लागि कवित्त बनावत, मोहिं तौ मेरे कवित्त बनावत॥ प्रस्तुत पंक्ति के रचयिता हैं उत्तर :- घनानन्द प्रश्न :- बैर क्रोध का अचार या मुरब्बा है, यह कथन किसका है उत्तर :- रामचन्द्र शुक्ल प्रश्न :- रामभक्त कवि नहीं हैं उत्तर :- नरोत्तमदास प्रश्न :- जीवन में हास्य का महत्त्व इसलिए है कि, वह जीवन को उत्तर :- सरस बनाता है प्रश्न :- श्रृंगार रस का स्थायी भाव है उत्तर :- रति प्रश्न :- रहीम द्वारा लिखित इन पंक्तियों में 'बड़े' शब्द का प्रयोग जिस रूप में हुआ है, वह है- प्रश्न :- बड़े बड़ाई ना करें, बड़े न बोलें बोल। प्रश्न :- रहिमन हीरा कब कहै, लाख टका मेरो मोल॥ उत्तर :- संज्ञा प्रश्न :- किस रस का संचारी भाव उग्रता, गर्व, हर्ष आदि है उत्तर :- वीर प्रश्न :- कबीरदास की भाषा थी उत्तर :- सधुक्कड़ी प्रश्न :- "रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून" में कौन-सा अलंकार है उत्तर :- श्लेष प्रश्न :- 'कितने पाकिस्तान' नामक उपन्यास के लेखक हैं उत्तर :- कमलेश्वर प्रश्न :- राजेन्द्र कुमार द्वारा सम्पादित पुस्तक 'आलोचना का विवेक' किस विधा से संबंधित है उत्तर :- आलोचना प्रश्न :- 'भ्रमरगीत' के रचयिता हैं उत्तर :- सूरदास प्रश्न :- 'ईदगाह' कहानी के रचनाकार हैं उत्तर :- प्रेमचंद प्रश्न :- कवि कालिदास की 'अभिज्ञान शाकुंतलम' का हिन्दी अनुवाद किसने किया उत्तर :- राजा लक्ष्मण सिंह प्रश्न :- 'यह काम मैं आप कर लूँगा', पंक्तियों में 'आप' है उत्तर :- निजवाचक सर्वनाम प्रश्न :- निम्नलिखित में से कौन-सा स्त्रीलिंग में प्रयुक्त होता है उत्तर :- ऋतु प्रश्न :- 'तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए' में कौन-सा अलंकार है उत्तर :- अनुप्रास अलंकार प्रश्न :- मुग़ल काल में किस भाषा को रेख्यां कहा गया है उत्तर :- उर्दू प्रश्न :- मुग़ल काल की राजकीय भाषा थी उत्तर :- उर्दू प्रश्न :- हिन्दी भाषा बोलने वाले भारतीयों का प्रतिशत लगभग है उत्तर :- 40 प्रतिशत प्रश्न :- दक्षिण भारत में हिन्दी भाषा के क्षेत्र में किसने प्रचार-प्रसार किया उत्तर :- सी. राजगोपालाचारी प्रश्न :- हिन्दी के पश्चात भारत की दूसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है उत्तर :- बांग्ला प्रश्न :- दक्षिण भारत की सर्वाधिक प्राचीन भाषा है उत्तर :- तमिल प्रश्न :- भारत की किस भाषा को 'इटालियन ऑफ़ द ईस्ट' कहा जाता है उत्तर :- तेलुगु प्रश्न :- गंगा छवि वर्णन' कविता के रचनाकार हैं उत्तर :- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र प्रश्न :- 'अनामदास का पौधा' उपन्यास के रचयिता हैं उत्तर :- हज़ारी प्रसाद द्विवेदी प्रश्न :- 'वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे' के रचयिता हैं उत्तर :- मैथिलीशरण गुप्त प्रश्न :- कौन-सी भाषा देवभाषा है उत्तर :- संस्कृत प्रश्न :- चोल शासकों की भाषा क्या थी उत्तर :- तमिल प्रश्न :- निम्नलिखित में से कौन-सी भाषाएँ हाल ही में प्राचीन भाषाएँ घोषित की गई है उत्तर :- कन्नड़ एवं तेलुगु प्रश्न :- भारत की तीसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है उत्तर :- तेलुगु प्रश्न :- निम्नलिखित में से किसमें तमिल एक प्रमुख भाषा है उत्तर :- सिंगापुर प्रश्न :- आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने रीतिकाल को 'श्रृंगारकाल' नाम दिया, लेकिन उन्होंने इस पर जो ग्रंथ लिखा, उसका नाम 'हिन्दी का श्रृंगारकाल' नहीं है, बल्कि उसका नाम है उत्तर :- हिन्दी साहित्य का अतीत प्रश्न :- 'भारत मित्र' पत्र (जो कलकत्ता से सन् 1934 में प्रकाशित हुआ था) के एक सम्पादक थे उत्तर :- रुद्रदत्त शर्मा प्रश्न :- 'मेवाड़ की पन्ना' नामक धाय के अलौकिक त्याग का ऐतिहासिक वृत्त लेकर 'राजमुकुट' नाटक की रचना की गई थी, इस नाटक के लेखक का नाम है उत्तर :- गोविंद बल्लभ पंत प्रश्न :- डॉ. कृष्ण शंकर शुक्ल ने आचार्य केशवदास पर एक समीक्षात्मक पुस्तक लिखी थी, उस पुस्तक का नाम है उत्तर :- केशव की काव्यकला प्रश्न :- 'आत्मनिर्भरता' निबंध के रचनाकार हैं उत्तर :- बालकृष्ण भट्ट



महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर - 7

प्रश्न :- 'समांतर कहानी' के प्रवर्तक कौन थे उत्तर :- कमलेश्वर प्रश्न :- 'श्रद्धा' किस कृति की नायिका हैं उत्तर :- कामायनी प्रश्न :- 'तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहिं न पान'। इस पंक्ति के रचयिता हैं उत्तर :- रहीम प्रश्न :- 'तरनि-तनूजा-तट तमाल तरुवर बहु छाए'। इस पंक्ति के रचयिता हैं उत्तर :- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र प्रश्न :- भूषण की कविता का प्रधान स्वर है उत्तर :- प्रशस्तिपरक प्रश्न :- भक्तिकाल की रामाश्रयी शाखा के निम्नलिखित में से कौन-से कवि हैं उत्तर :- तुलसीदास प्रश्न :- भक्तिकाल में एक ऐसा कवि हुआ, जिसने अपने भाव व्यक्त करने के लिए उर्दू, फ़ारसी, खड़ीबोली आदि के शब्दों का मुक्त उपयोग किया है उत्तर :- कबीर प्रश्न :- हिन्दी के प्रथम गद्यकार हैं उत्तर :- लल्लूलाल प्रश्न :- 'राग दरबारी' उपन्यास के रचयिता हैं उत्तर :- श्रीलाल शुक्ल प्रश्न :- 'पूस की रात' कहानी के रचनाकार हैं उत्तर :- प्रेमचन्द प्रश्न :- 'पंच परमेश्वर' के लेखक हैं उत्तर :- प्रेमचन्द प्रश्न :- 'तोड़ती पत्थर' (कविता) के कवि हैं उत्तर :- सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' प्रश्न :- 'हार की जीत' (कहानी) के कहानीकार हैं उत्तर :- सुदर्शन प्रश्न :- 'रानी केतकी की कहानी' के रचयिता हैं उत्तर :- इंशा अल्ला ख़ाँ प्रश्न :- 'शिव शंभु के चिट्ठे' से संबंधित रचनाकार हैं उत्तर :- बाल मुकुन्द गुप्त प्रश्न :- 'रसिक प्रिया' के रचयिता हैं उत्तर :- केशवदास प्रश्न :- 'कुटज' के रचयिता हैं उत्तर :- हज़ारी प्रसाद द्विवेदी प्रश्न :- मसि कागद छुयो नहीं कलम गही नहिं हाथ॥ प्रस्तुत पंक्ति के रचयिता हैं उत्तर :- कबीरदास प्रश्न :- 'चन्दन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग'। इस पंक्ति के रचयिता हैं उत्तर :- रहीम प्रश्न :- 'जब-जब होय धर्म की हानी, बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी'। इस पंक्ति के रचयिता हैं उत्तर :- तुलसीदास प्रश्न :- "यदि चादर के बाहर........पसारोगे तो पछताओगे" उत्तर :- पैर प्रश्न :- (वाक्य में उचित विराम चिह्न लगाएँ) उसने एम ए बी एड पास किया है उत्तर :- एम.ए., बी.एड प्रश्न :- 'महाभोज' रचना की प्रधान समस्या को उजागर करने वाले विकल्प को चुनिए उत्तर :- राजनीतिक समस्या प्रश्न :- अर्द्धसम मात्रिक जाति का छन्द है उत्तर :- दोहा प्रश्न :- तोड़ती पत्थर' कैसी कविता है उत्तर :- यथार्थवादी प्रश्न :- अवधी भाषा के सर्वाधिक लोकप्रिय महाकाव्य का नाम है उत्तर :- रामचरितमानस प्रश्न :- विद्यापति की 'पदावली' की भाषा क्या है उत्तर :- मैथिली प्रश्न :- 'शेष कादम्बरी' के रचयिता हैं उत्तर :- अलका सरावगी प्रश्न :- 'मुख रूपी चाँद पर राहु भी धोखा खा गया' पंक्तियों में अलंकार है उत्तर :- रूपक प्रश्न :- जहाँ किसी वस्तु का लोक-सीमा से इतना बढ़कर वर्णन किया जाए कि वह असम्भव की सीमा तक पहुँच जाए, वहाँ अलंकार होता है उत्तर :- अत्युक्ति प्रश्न :- अपभ्रंश का वाल्मीकि किसे कहा गया है उत्तर :- स्वयंभू प्रश्न :- बिहारी, बंगाली, उड़िया और असमिया भाषाओं का जन्म कौन-से अपभ्रंश से हुआ है उत्तर :- मागधी प्रश्न :- निम्न में से कंठ्य ध्वनियाँ कौन-सी हैं उत्तर :- क, ख प्रश्न :- 'क', 'ख', 'ग', और 'फ' में से कौन-सा अक्षर उर्दू से लिया गया है उत्तर :- फ प्रश्न :- वर्ण के द्वितीय व चतुर्थ व्यंजन क्या कहलाते हैं उत्तर :- महाप्राण प्रश्न :- भावों और विचारों को प्रकट करने वाले मानव-मुख से निकले ध्वनि-संकेतों को क्या कहते हैं उत्तर :- भाषा प्रश्न :- एक भाषा दूसरी भाषा से क्या लेती है उत्तर :- शब्दावली प्रश्न :- सर्वप्रथम भाषा का प्रयोग किस रूप में हुआ उत्तर :- सांकेतिक प्रश्न :- किस रस को 'रसराज' कहा जाता है उत्तर :- श्रृंगार रस प्रश्न :- संस्कृत भाषा का प्राचीनतम रूप कहाँ दिखाई पड़ता है उत्तर :- ऋग्वेद प्रश्न :- हिन्दी भाषा का जन्म हुआ है उत्तर :- पाली प्राकृत से प्रश्न :- 'ग्रियर्सन' ने किसे 'देशी हिन्दुस्तानी' कहा है उत्तर :- खड़ी बोली प्रश्न :- स्वयंभू ने किस भाषा को 'देसी भाषा' कहा है उत्तर :- अपभ्रंश प्रश्न :- किस पुस्तक में हिन्दी का सर्वप्रथम उल्लेख हुआ उत्तर :- रामचरितमानस प्रश्न :- शौरसेनी, पैशाची, महाराष्ट्री, अर्द्धमागधी और मागधी, ये निम्न में से किस भाषा के पाँच भेद हैं उत्तर :- प्राकृत प्रश्न :- भारतीय आर्यों की भाषा में 'ट' वर्ग की ध्वनियाँ किसकी देन हैं उत्तर :- द्रविड़ भाषाओं की प्रश्न :- 'ट', 'ठ', 'ड', 'ढ' वर्णों का प्रयोग होता है उत्तर :- ओज प्रश्न :- वीर रस का स्थायी भाव क्या होता है उत्तर :- उत्साह प्रश्न :- स्थायी भावों की कुल संख्या कितनी है उत्तर :- 9 प्रश्न :- 'धनाक्षरी छंद' किस प्रकार का छंद है उत्तर :- वर्णित प्रश्न :- निम्न में से पृथ्वी का पर्यायवाची शब्द कौन-सा है उत्तर :- रत्नगर्भा प्रश्न :- हिन्दी साहित्य का नौवाँ रस कौन-सा है उत्तर :- शांत रस प्रश्न :- सर्वश्रेष्ठ रस किसे माना जाता है। उत्तर :- श्रृंगार रस प्रश्न :- छंद का सर्वप्रथम उल्लेख कहाँ मिलता है उत्तर :- ऋग्वेद प्रश्न :- हिन्दी साहित्य के आरंभिक काल को आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने क्या कहा है उत्तर :- वीरगाथा काल प्रश्न :- 'शिवा बावनी' के रचनाकार कौन हैं उत्तर :- भूषण प्रश्न :- निम्न में से प्रेमचंद के अधूरे उपन्यास का नाम क्या है उत्तर :- मंगलसूत्र प्रश्न :- हिन्दी के प्रथम गद्यकार हैं उत्तर :- लल्लूलाल प्रश्न :- निम्नलिखित में से कौन-सी बोली पूर्वी हिन्दी की नहीं है उत्तर :- मालवी बोली प्रश्न :- 'जब-जब होय धर्म की हानी, बाढ़ै असुर अधम अभिमानी', पंक्ति के रचनाकार कौन हैं उत्तर :- तुलसीदास प्रश्न :- 'अनिल' का पर्यायवाची शब्द क्या है उत्तर :- पवन प्रश्न :- 'कठिन काव्य के प्रेत हैं', यह किस कवि के लिए कहा गया है उत्तर :- अज्ञेय प्रश्न :- 'मुख रूपी चाँद पर राहु भी धोखा खा गया', इन पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है उत्तर :- रूपक प्रश्न :- वियोगी हरि जी का पूर्ण नाम क्या था उत्तर :- श्री हरि द्विवेदी प्रश्न :- कौन-सी बोली पश्चिमी हिन्दी की नहीं है उत्तर :- बघेली बोली प्रश्न :- इनमें से सही शब्द कौन-सा है उत्तर :- श्रृंगार प्रश्न :- 'पंचवटी' शब्द में कौन-सा समास है उत्तर :- बहुब्रीहि प्रश्न :- 'कुरुक्षेत्र' को क्या कहा जाता है। उत्तर :- रणक्षेत्र प्रश्न :- हिन्दी वर्णमाला में स्वरों की संख्या कितनी है उत्तर :- दस प्रश्न :- जयशंकर प्रसाद का संबंध किस काव्य-प्रवृत्ति से है उत्तर :- छायावाद प्रश्न :- निम्नलिखित भाषाओं में से कौन-सी भाषा उत्तर प्रदेश में नहीं बोली जाती उत्तर :- मैथिली भाषा प्रश्न :- भक्ति को रस रूप में प्रतिष्ठित करने वाले आचार्य कौन हैं उत्तर :- वल्लभाचार्य प्रश्न :- ह्रदय की वह कौन-सी स्थायी दशा है, जो सदाचार को प्रेरित करती है उत्तर :- शील दशा प्रश्न :- प्रयोगवाद को 'बैठे ठाले का धन्धा' किस आलोचक ने कहा उत्तर :- नन्द दुलारे वाजपेयी प्रश्न :- चंदबरदाई किसके दरबारी कवि थे उत्तर :- पृथ्वीराज चौहान के प्रश्न :- अपभ्रंश को 'पुरानी हिन्दी' किसने कहा है उत्तर :- चन्द्रधर शर्मा गुलेरी प्रश्न :- कबीर किस काव्य धारा के कवि हैं उत्तर :- ज्ञानमार्गी प्रश्न :- 'विपाशा पत्रिका' का प्रकाशन किस प्रदेश से होता है उत्तर :- उत्तर प्रदेश प्रश्न :- साहित्य को क्या माना गया है उत्तर :- कठिन तपस्या और महान यज्ञ प्रश्न :- निम्न में से किन्हें 'राष्ट्रकवि' कहा जाता है उत्तर :- रामधारी सिंह दिनकर प्रश्न :- कबीरदास की भाषा थी उत्तर :- सधुक्कड़ी बोली प्रश्न :- 'जनमेजय का नागयज्ञ' किसकी कृति हैं उत्तर :- जयशंकर प्रसाद प्रश्न :- 'श्रद्धा' किस कृति की नायिका है उत्तर :- कामायनी प्रश्न :- हिन्दी नाटकों के मंचन में 'यक्षगान' का प्रयोग किसने किया है उत्तर :- गिरीश कर्नाड प्रश्न :- आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के निबन्ध संग्रह का नाम है उत्तर :- चिंतामणि प्रश्न :- भारत में सर्वाधिक किस भाषा का प्रयोग किया जाता है उत्तर :- हिन्दी भाषा प्रश्न :- अधिकतर भारतीय भाषाओं का विकास किस लिपि से हुआ उत्तर :- ब्राह्मी लिपि प्रश्न :- हिन्दी खड़ी बोली किस अपभ्रंश से विकसित हुई है उत्तर :- शौरसेनी प्रश्न :- श्रृंगार रस का स्थायी भाव क्या है उत्तर :- अद्भुत प्रश्न :- माधुर्य गुण का किस रस में प्रयोग होता है उत्तर :- भयानक प्रश्न :- नवल सुन्दर श्याम में कौन-सा अलंकार है उत्तर :- उल्लेख अलंकार प्रश्न :- 'कामायनी' किस प्रकार का ग्रंथ है उत्तर :- महाकाव्य प्रश्न :- कालिदास की अन्तिम रचना 'अभिज्ञान शाकुन्तलम्' का हिन्दी अनुवाद किसने किया था उत्तर :- राजा लक्ष्मण सिंह प्रश्न :- तुलसीदास ने अपनी रचनाओं में किसका वर्णन किया है उत्तर :- राम प्रश्न :- ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले हिन्दी के प्रथम साहित्यकार हैं उत्तर :- सुमित्रानन्दन पंत प्रश्न :- 'आकाशदीप' कहानी के लेखक हैं उत्तर :- जयशंकर प्रसाद प्रश्न :- 'रामचरितमानस' में कितने काण्ड हैं उत्तर :- 7 प्रश्न :- 'राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय' कहाँ है उत्तर :- नई दिल्ली प्रश्न :- श्रृंगार रस का स्थायी भाव है उत्तर :- रति प्रश्न :- जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी। प्रस्तुत पंक्ति के रचयिता हैं उत्तर :- तुलसीदास प्रश्न :- भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में हिन्दी को राजभाषा घोषित किया गया है उत्तर :- 343 प्रश्न :- खड़ी बोली का प्रयोग सबसे पहले किस पुस्तक में हुआ उत्तर :- प्रेम सागर प्रश्न :- देवनागरी लिपि का विकास किस लिपि से हुआ है उत्तर :- ब्राह्मी लिपि प्रश्न :- निम्नलिखित शब्दों में से किसमें व्यंजन संधि है उत्तर :- सत्कार प्रश्न :- 'भारत भारती' (काव्य) के रचयिता का नाम है उत्तर :- मैथिलीशरण गुप्त प्रश्न :- सर्वनाम कितने प्रकार के होते हैं उत्तर :- छ:



महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर - 8

प्रश्न :- भरतमुनि ने अपभ्रंश को नाम दिया है उत्तर :- अशुद्धभाषा प्रश्न :- 'महोदय' में कौन-सी संधि है उत्तर :- गुण प्रश्न :- अष्टछाप के कवियों में प्रथम नियुक्त कीर्तनकार कवि कौन थे उत्तर :- सूरदास प्रश्न :- 'उद्धवशतक' किसकी कृति है उत्तर :- जगन्नाथदास रत्नाकर प्रश्न :- 'प्रभुजी तुम चन्दन हम पानी' किसकी पंक्ति है उत्तर :- रैदास प्रश्न :- 'एक भारतीय आत्मा' नाम से कविता की रचना किसने की उत्तर :- माखन लाल चतुर्वेदी ने प्रश्न :- अज्ञेय की कौन-सी रचना यात्रा पर आधारित है उत्तर :- एक बूंद सहसा उछली प्रश्न :- इनमें से कौन भरतमुनि के रस-सूत्र का व्याख्याकार है उत्तर :- भट्टलोल्लट प्रश्न :- 'रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून' में कौन-सा अलंकार है उत्तर :- श्लेष प्रश्न :- जयशंकर प्रसाद की 'चन्द्रगुप्त' निम्नांकित में से क्या है उत्तर :- नाटक प्रश्न :- तुलसीदास की किस रचना का सम्बन्ध ज्योतिष से है उत्तर :- रामाज्ञा प्रश्न प्रश्न :- 'कवि सम्राट' इसे कहा जाता है उत्तर :- अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' प्रश्न :- निम्न में से स्त्रीलिंग शब्द कौन-सा है उत्तर :- ठंडाई प्रश्न :- हिन्दी ग़ज़ल लेखन का कार्य किसने प्रारंभ किया उत्तर :- दुष्यंत कुमार प्रश्न :- निम्नलिखित में कौन-सी हिन्दी पत्रिका है उत्तर :- केरल ज्योति प्रश्न :- 'मधुर-मधुर मेरे दीपक जल' में कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है उत्तर :- विरह और रहस्य प्रश्न :- 'बरवै रामायण' किसकी रचना है उत्तर :- तुलसीदास प्रश्न :- निम्नलिखित में से अर्द्ध स्वर कौन-सा है उत्तर :- य प्रश्न :- हिन्दी की मूल उत्पत्ति किससे हुई है उत्तर :- वैदिक संस्कृत प्रश्न :- निम्नलिखित में से कौन-सी भाषा देवनागरी लिपि में लिखी जाती है उत्तर :- मराठी भाषा प्रश्न :- इनमें संयुक्त व्यंजन कौन-सा है उत्तर :- ज्ञ प्रश्न :- सूर्य शब्द का स्त्रीलिंग क्या होगा उत्तर :- सूर्या प्रश्न :- हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल को इस नाम से भी अभिहित किया जाता है उत्तर :- गद्य काल प्रश्न :- मुझे तोड़ लेना वनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक प्रश्न :- मातृभूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पथ जावें वीर अनेक प्रश्न :- प्रस्तुत पंक्ति के रचयिता हैं उत्तर :- माखन लाल चतुर्वेदी प्रश्न :- रामधारी सिंह दिनकर किस रस के कवि माने जाते हैं उत्तर :- वीर रस प्रश्न :- 'मधुशाला' के लेखक हैं उत्तर :- हरिवंश राय बच्चन प्रश्न :- जहाँ बिना कारण के कार्य का होना पाया जाए वहाँ कौन सा अलंकार होता है उत्तर :- विभावना प्रश्न :- हिन्दी की पहली कहानी लेखिका का नाम है उत्तर :- बंग महिला प्रश्न :- 'मोक्ष की इच्छा करने वाला' कहलाता है उत्तर :- मुमुक्षु प्रश्न :- संज्ञा के कितने भेद हैं उत्तर :- तीन प्रश्न :- निम्नलिखित में से कौन-सी रचना खड़ी बोली की है उत्तर :- साकेत प्रश्न :- 'ठेले पर हिमालय' किसकी रचना है उत्तर :- धर्मवीर भारती प्रश्न :- सबसे प्राचीन कौन सी वीरता है। उत्तर :- वाकवीरता प्रश्न :- 'आँसू' का बहुवचन क्या होगा उत्तर :- आँसुओं प्रश्न :- 'नीलकमल' में कौन-सा समास है उत्तर :- कर्मधारय समास प्रश्न :- 'गीतांजलि' के रचयिता कौन हैं उत्तर :- रबीन्द्रनाथ टैगोर प्रश्न :- चाय किस भाषा का शब्द है उत्तर :- चीनी प्रश्न :- व्याकरण की दृष्टि से 'प्रेम' शब्द क्या है उत्तर :- भाववाचक संज्ञा प्रश्न :- उत्तर भारत में भक्ति का प्रसार करने का श्रेय किसे प्राप्त है उत्तर :- स्वामी रामानंद प्रश्न :- हिन्दी का पहला दैनिक समाचार-पत्र कौन-सा था उत्तर :- उतण्ड मार्तण्ड प्रश्न :- जयशंकर प्रसाद की काव्य-भाषा कौन-सी है उत्तर :- खड़ी बोली प्रश्न :- 'दाँतों तले अंगुली दबाना' का अर्थ क्या होगा उत्तर :- आश्चर्य करना प्रश्न :- भारत-विभाजन और सांप्रदायिकता की घटनाओं से संबंधित कौन-सी कहानी है उत्तर :- मलवे का मालिक प्रश्न :- भाषा के शुद्ध रूप का ज्ञान किससे होता है उत्तर :- व्याकरण प्रश्न :- निम्नलिखित में से कौन-सी रचना रामधारी सिंह 'दिनकर' की है उत्तर :- उर्वशी प्रश्न :- मैथिली का विकास किस अपभ्रंश से माना जाता है उत्तर :- मागधी अपभ्रंश प्रश्न :- रामकथा पर आधारित काव्य कौन-सा है उत्तर :- अग्निलीक प्रश्न :- काव्य क्षेत्र में 'प्रबन्ध शिरोमणि' की उपाधि किसे दी गई है उत्तर :- मैथिलीशरण गुप्त प्रश्न :- जहाँ उपमेय में अनेक उपमानों की शंका होती है, वहाँ कौन-सा अलंकार होता है उत्तर :- संदेह प्रश्न :- हिन्दी साहित्य के इतिहास के सर्वप्रथम लेखक का नाम क्या है उत्तर :- गार्सा द तासी प्रश्न :- 'प्रेमसागर' के लेखक कौन हैं। उत्तर :- लल्लू लाल प्रश्न :- 'चरण-कमल बन्दौ हरि राई' में कौन-सा अलंकार है उत्तर :- रूपक अलंकार प्रश्न :- जिन शब्दों के अंत में 'अ' आता है, उन्हें क्या कहते हैं उत्तर :- अकारांत प्रश्न :- सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला की कविता 'जूही की कली' किसका उदाहरण है उत्तर :- मुक्त छंद का प्रश्न :- वल्लभाचार्य किस सम्प्रदाय के संस्थापक हैं उत्तर :- शुद्धाद्वैत प्रश्न :- निम्न में से किस पुस्तक में 'भ्रमरगीत' का प्रसंग है उत्तर :- सूरसागर प्रश्न :- 'गागर में सागर' मुहावरे का अर्थ क्या है उत्तर :- संक्षेप में गहरी बात कहना प्रश्न :- 2007 ई. का आठवां 'विश्व हिन्दी सम्मेलन' कहाँ आयोजित हुआ था उत्तर :- न्यूयॉर्क प्रश्न :- चौपाई के चारों चरणों में कितनी मात्राएँ होती है उत्तर :- सोलह प्रश्न :- अपभ्रंश शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया उत्तर :- पतंजलि प्रश्न :- भारतेन्दु हरिशचंद्र के अनुसार हिन्दी नयी चाल में कब ढली उत्तर :- 1873 ई. प्रश्न :- 'तोड़ती पत्थर' कैसी कविता है उत्तर :- यथार्थवादी प्रश्न :- 'शोभित कर नवनीत लिए, घुटरुनि चलत रेनु तन मण्डित मुख दधि लेप किए'। इन पंक्तियों में कौन-सारस है उत्तर :- वात्सल्य रस प्रश्न :- रीतिकाल का वह कौन-सा कवि है, जो अपनी मात्र एक कृति से हिन्दी साहित्य में अमर हो गया उत्तर :- बिहारी प्रश्न :- निम्नलिखित में से 'छायावाद' के प्रवर्तक का नाम क्या है उत्तर :- जयशंकर प्रसाद प्रश्न :- निम्न विकल्पों में से कौन-सा एक महाकाव्य नहीं है उत्तर :- कुरुक्षेत्र प्रश्न :- अर्थ के आधार पर वाक्य के कितने भेद होते हैं उत्तर :- आठ प्रश्न :- मनोविश्लेषणात्मक शैली के उपन्यासकार कौन हैं उत्तर :- इलाचन्द्र जोशी प्रश्न :- बिहारी निम्नलिखित में से किस काल के कवि थे उत्तर :- रीतिकाल प्रश्न :- दोपहर के बाद के समय को क्या कहा जाता है उत्तर :- अपराह्न प्रश्न :- 'बुँदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। प्रश्न :- खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥' प्रश्न :- प्रस्तुत उपरोक्त पक्तियों के रचयिता कौन हैं उत्तर :- सुभद्रा कुमारी चौहान प्रश्न :- नीलगाय में कौन-सा समास है उत्तर :- कर्मधारय प्रश्न :- हिन्दी भाषा में कितने वचन होते हैं उत्तर :- दो प्रश्न :- 'विनयपत्रिका' के रचयिता का नाम क्या है उत्तर :- तुलसीदास प्रश्न :- प्रथम सूफ़ी प्रेमाख्यानक काव्य के रचयिता कौन हैं उत्तर :- मुल्ला दाऊद प्रश्न :- निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द 'तत्सम' है उत्तर :- काल प्रश्न :- चौपाई के चारों चरणों में कितनी मात्राएँ होती हैं उत्तर :- सोलह प्रश्न :- 'अशोक के फूल' (निबंध-संग्रह) के रचनाकार कौन हैं उत्तर :- हज़ारी प्रसाद द्विवेदी प्रश्न :- हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल को इस नाम से भी अभिहित किया जाता है उत्तर :- गद्य काल प्रश्न :- 'मानवीकरण अलंकार' का प्रयोग किस प्रकार की कविता में हुआ है उत्तर :- नयी कविता में प्रश्न :- 'रामचरितमानस' किस भाषा में लिखा गया है उत्तर :- अवधी प्रश्न :- पृथ्वीराज रासो' किस काल की रचना है उत्तर :- आदि काल प्रश्न :- 'विखंडन' की अवधारणा का संबंध किस 'वाद' से है उत्तर :- संरचनावाद प्रश्न :- जायसी के सर्वोत्कृष्ट ग्रंथ का नाम क्या है उत्तर :- पद्मावत प्रश्न :- "ऊधव मोहिं ब्रज बिसरावत नाहीं" में कौन-सा रस है उत्तर :- श्रृंगार रस प्रश्न :- दोहा और रोला को क्रम से मिलाने पर कौन-सा छंद बनता है उत्तर :- कुण्डलिया प्रश्न :- 'धातुसेन' प्रसाद के किस नाटक का पात्र है उत्तर :- स्कंदगुप्त प्रश्न :- 'मुन्डा भाषा' परिवार का क्षेत्र कौन-सा है उत्तर :- छोटा नागपुर प्रश्न :- 'आनन्द कादम्बिनी' पत्रिका के सम्पादक कौन थे उत्तर :- चौधरी बदरीनारायण प्रेमघन प्रश्न :- 'राजगृह' में कौन-सा समास विद्यमान है उत्तर :- तत्पुरुष समास प्रश्न :- 'कामायनी' किसकी रचना है उत्तर :- जयशंकर प्रसाद प्रश्न :- 'इतिहास' शब्द का शुद्ध विशेषण क्या है उत्तर :- ऐतिहासिक प्रश्न :- 'महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय' का मुख्यालय कहाँ पर है उत्तर :- वर्धा प्रश्न :- राजेंद्र कुमार द्वारा सम्पादित पुस्तक 'आलोचना का विवेक' किस विधा से संबंधित है उत्तर :- आलोचना प्रश्न :- 'बीसलदेव रासो' के रचनाकार का नाम क्या हैं उत्तर :- नरपति नाल्ह प्रश्न :- भूषण किस रस के कवि थे उत्तर :- वीर रस प्रश्न :- 'निराला' को कैसा कवि माना जाता है उत्तर :- क्रान्तिकारी प्रश्न :- ज्ञानपीठ पुरस्कार किस क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य के लिए दिया जाता है उत्तर :- साहित्य प्रश्न :- 'कठिन काव्य का प्रेत' किस कवि को कहा जाता हैं उत्तर :- केशवदास को प्रश्न :- हिन्दी में स्वतंत्र रूप से बोले जाने वाले अक्षर क्या कहलाते हैं उत्तर :- स्वर प्रश्न :- हिन्दी भाषा में वे ध्वनियाँ कौन सी हैं, जो दूसरी ध्वनियों की सहायता से बोली या लिखी जाती हैं उत्तर :- व्यंजन प्रश्न :- निम्नलिखित में से कौन-सी पुस्तक 'रामचन्द्र शुक्ल' द्वारा लिखी गई है उत्तर :- हिन्दी साहित्य का इतिहास प्रश्न :- वीर रस का स्थायी भाव क्या होता है उत्तर :- उत्साह प्रश्न :- अवधी भाषा के सर्वाधिक लोकप्रिय महाकाव्य का नाम क्या है उत्तर :- रामचरित मानस प्रश्न :- निम्नलिखित में से कौन-सा पश्च स्वर है उत्तर :- आ प्रश्न :- 'रसोईघर' में कौन-सा समास है उत्तर :- तत्पुरुष प्रश्न :- हिन्दी साहित्य के किस भाव को व्यभिचारी भाव कहा जाता है उत्तर :- संचारी भाव प्रश्न :- जहाँ एक ही शब्द के अनेक अर्थ व्यक्त किये गए हों, तो वहाँ कौन-सा अलंकार होता है उत्तर :- श्लेष प्रश्न :- आदिकाल में किस कवि ने 'अवहट्ट भाषा' में रचना की उत्तर :- अब्दुल रहमान



महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर - 9

प्रश्न :- संज्ञा किसे कहते है- किसी व्यक्ति, वस्तु, नाम आदि के गुण, धर्म व स्वभाव का बोध कराने वाले शब्द संज्ञा कहलाते है। प्रश्न :- संज्ञा के भेद है ? उत्तर :- व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक, समुदाय वाचक और द्रव्यवाचक प्रश्न :- व्यक्तिवाचक संज्ञा किसे कहते हैं ? उत्तर :- जिस शब्द से किसी विशेष व्यक्ति, स्थान अथवा वस्तु का बोध हो वह व्यक्तिवाचक संज्ञा कहलाती है। इसमें व्यक्तियों के नाम, दिशाएं, देश, पहाड़ों के नाम, समुद्र, दिन-महीने, पुस्तक, समाचार पत्र, त्यौहार व उत्सव, नगर, सडक़, चौक के नाम, ऐतिहासिक युद्ध, राष्ट्रीय जाति, नदियों के नाम प्रश्न :- जातिवाचक संज्ञा कहलाती है ? उत्तर :- जिस संज्ञा शब्द से उसकी सम्पूर्ण जाति का बोध हो वह जातिवाचक संज्ञा कहलाती है। इसमें पशु-पक्षियों के नाम, वस्तुओं के नाम, प्राकृतिक आपदा, सामाजिक सम्बन्ध, पद और कार्य के नाम प्रश्न :- भाव वाचक संज्ञा किसे कहते हैं ? उत्तर :- जिस संज्ञा शब्द से पदार्थो की अवस्था, गुण, दोष, धर्म आदि का बोध हो। भाव वाचक संज्ञा अधिकांशत: प्रत्ययों से बनती है, जिनमें क्रदंत और तद्वित प्रत्यय है। कृदंत धातुओं से और तद्वित विशेषण व सर्वनाम से बनते है। प्रश्न :- समुदाय वाचक संज्ञा कहलाती है ? उत्तर :- जिन संज्ञा शब्दों से व्यक्तियों वस्तुओं आदि के समूह का बोध हो उन्हें समुदाय वाचक संज्ञा कहते है। जैसे कक्षा, भीड, सभा, गुच्छा, मण्डल, झुण्ड आदि प्रश्न :- द्रव्यवाचक संज्ञा है- जिन संज्ञा शब्दों से किसी धातु, द्रव्य आदि पदार्थो का बोध हो उन्हें द्रव्यवाचक संज्ञा कहते है। जैसे तेल, चांदी, सोना, चावल, पीतल, कोयला प्रश्न :- मानवता शब्द में संज्ञा है ? उत्तर :- भाववाचक प्रश्न :- वात्सल्य के वत्स शब्द में संज्ञा है ? उत्तर :- भाववाचक प्रश्न :- देव संज्ञा शद का विशेषण है ? उत्तर :-दैवीय प्रश्न :- संज्ञा के भेद होते हैं ? उत्तर :- पांच (व्यक्ति, जाति, भाव, द्रव्य और समुदाय वाचक) प्रश्न :- संज्ञा का भेद नहीं है ? उत्तर :- गुणवाचक प्रश्न :- ‘इन्हीं जयचंदों के कारण देश पराधीन हुआ’ वाक्य में तिरछे शब्द की संज्ञा है ? उत्तर :- जातिवाचक प्रश्न :- भाववाचक संज्ञा ‘औचित्य’ में मूल शब्द है ? उत्तर :- उचित प्रश्न :- लडक़ा शब्द का भाव वाचक संज्ञा होगी ? उत्तर :- लडक़पन प्रश्न :- स्त्रीत्व शब्द में कौन सी संज्ञा है ? उत्तर :- भाव वाचक संज्ञा प्रश्न :- सफेदी शब्द है ? उत्तर :- भाव वाचक संज्ञा प्रश्न :- सच्चरित्रता किस मूल शब्द से बना है ? उत्तर :- चरित्र से प्रश्न :- जवान, बालक, सुंदर, मनुष्य में कौनसा शब्द जातिवाचक संज्ञा नहीं है ? उत्तर :- सुंदर प्रश्न :- डकैती, आलसी, हरियाली, धीरज में भाव वाचक संज्ञा का उदाहरण नहीं है ? उत्तर :- आलसी प्रश्न :- बुढापा भी अभिशाप है इस वाक्य में बुढापा संज्ञा है ? उत्तर :- भाव वाचक संज्ञा की। प्रश्न :- ईश्वरत्व है ? उत्तर :- भाव वाचक संज्ञा प्रश्न :- निजत्व संज्ञा निर्मित है ? उत्तर :- सर्वनाम से प्रश्न :- विद्धवता, सेना, बचपन, दु:ख में जातिवाचक संज्ञा है ? उत्तर :- सेना प्रश्न :- परिष्कार, हरियाली, मिलावट संज्ञाएं है ? उत्तर :- भाव वाचक प्रश्न :- पानी कौनसी संज्ञा है ? उत्तर :- जातिवाचक प्रश्न :- लाल बहादुर शास्त्री भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री थे। यशस्वी संज्ञा है ? उत्तर :- व्यक्तिवाचक



महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर - 10

प्रश्न :- अर्थ की दृष्टि से शब्द के प्रकार है? उत्तर :- सार्थक और निरर्थक प्रश्न :- सार्थक शब्द कहलाते हैं ? उत्तर :- जिन शब्दों से किसी अर्थ का बोध हो वे सार्थक शब्द कहलाते है। प्रश्न :- निरर्थक शब्द कहलाते हैं ? उत्तर :- जिन शब्दों का कोई अर्थ नहीं निकलता उन्हें निरर्थक शब्द कहते है। जैसे चर्र चूं, खटर-पटर, गडगड प्रश्न :- व्युत्पति (बनावट) की दृष्टि से शब्दों के भेद है ? उत्तर :- रूढ, यौगिक, योगारूढ़ प्रश्न :- रूढ शब्द कहलाते हैं ? उत्तर :- जिन शब्दों के खण्ड न किए जा सके और यदि खण्ड कर भी दिए तो उनका कोई अर्थ नहीं निकलता जैसे घोडा, मोर आदि प्रश्न :- यौगिक शब्द कहलाते है- जो दो या दो से अधिक शब्दों अथवा शब्दांशों के मेल से बने हो वे यौगिक शब्द कहलाते है। इनके शब्दांश सार्थक होते है। प्रश्न :- योगरूढ शब्द किसे कहते हैं ? उत्तर :- जो शब्द यौगिक होने पर भी किसी सामान्य अर्थ को प्रकट न करके रूढ शब्दों के समान किसी विशेष अर्थ को प्रकट करते है। प्रश्न :- रूप परिवर्तन की दृष्टि से शब्दों की कोटियां है ? उत्तर :- दो (विकारी और अविकारी) प्रश्न :- विकारी शब्द होते हैं ? उत्तर :- ऐसेशब्द जिनमें व्याकरणिक नियमों के अनुसार अर्थात लिंग, वचन, कारक, पुरूष, काल आदि के आधार पर रूप में परिवर्तन आ जाता है वे विकारी शब्द कहलाते है। प्रश्न :- अविकारी शब्द होते हैं ? उत्तर :- इन शब्दों में लिंग, वचन, कारक, पुरूष, काल आदि के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता है। जैसे आज, अरे, यहां, कौन, बहुत, धीरे प्रश्न :- स्त्रोत के आधार पर शब्द के प्रकार है ? उत्तर :- तत्सम, तद्भव, देशी और विदेशी प्रश्न :- तत्सम शब्द का शाब्दिक अर्थ है ? उत्तर :- तत् = उसके (संस्कृत), सम=समान। अर्थात संस्कृत भाषा के समान है। तत्सम शब्द संस्कृत है और मौलिक रूप में बिना परिवर्तन के हिन्दी में प्रयुक्त होते है। प्रश्न :- तत्सम शब्द के उदाहरण है ? उत्तर :- अंकुर, अम्बुज, इच्छा, गिरि, गीत, चरम, छिद्र, ज्वाला, दास, नारी, परास्त, परम आदि प्रश्न :- तद्भव शब्द है ? उत्तर :- ये शब्द संस्कृत शब्दों के विकृत रूप है और इसी रूप में ये हिन्दी भाषा में प्रयुक्त होने लगे हैं। जैसे अचरज, ऑंख, कान, ऊंट, चॉंद, खेत, दॉंत, दूध, सूत प्रश्न :- देशी या देशज शब्द है- यह शब्द भारत की भिन्न भिन्न प्रांतीय भाषा या आदिम निवासियों की भाषाओं से हिन्दी में आए है जसे लकड़ी, पगड़ी, पेट, खिचड़ी, ठेठ, तेंदुआ प्रश्न :- विदेशी शब्द से आशय है ? उत्तर :- वह शब्द जो विदेशी भाषाओं से हिन्दी में आए गए और यथावत प्रयोग हो रहे है। प्रश्न :- अरबी भाषा से हिन्दी में प्रयुक्त शब्द है ? उत्तर :- औलाद, कानून, मौलवी, औरत, फकीर, इज्जत प्रश्न :- फारसी भाषा से हिन्दी में प्रयुक्त शब्द है ? उत्तर :- दुकान, अनार, आदमी, खंजर, कलम, चश्मा जल्दी प्रश्न :- पुर्तगाली से हिन्दी में लिए गए शब्द है ? उत्तर :- गिरजा, आलू, बाल्टी, नीलाम, कमरा, कारतूस, आलपीन, कमीज, चाबी, प्रश्न :- हिन्दी में तुर्की भाषा में लिए शब्द है ? उत्तर :- तोप, कालीन, तमगा, चाकू



महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर - 11

● सोरठा छंद के लक्षण है - यह मात्रिक सम छंद है। विषम चरण में 11 व सम चरण में 13 मात्राएं होती है। तुक विषम चरणों की मिलती है। यह छंद दोहा का उल्टा होता है। ● सोरठा का उदाहरण है - ● अकबर समंद अथाह तहै डूबा हिन्दू तुरक ● मेवाड़ों तिण मांह पोयण फूल प्रताप सी ● चौपाई छंद के लक्षण है - यह मात्रिक सम छंद है। प्रत्येक चरण में 16 मात्रा और अंत में गुरु लघु न होते है ● चौपाई का उदाहरण है - ● सुनी जननी! सोह सुत बडभागी, जो पितृ मात वचन अनुरागी ● तनय मात-पितृ तोखनहारा, दरलभ जननि! सकल संसारा ● हरिगीतिका के प्रत्येक चरण में कितनी मात्राएं होती है - 28 ● वर्णिक छंद कौन-कौन से है - दु्रतविलम्बित, कवित्त, मंदाक्रांता ● श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि... में छंद है - दोहा ● कंकन किंकिन नूपुर धुनि सुनि, कहत लखन सन राम ह्दय गुनि में छंद है - चौपाई ● संसार की समर स्थली में धीरता धारण करो चलते हुए निज दुष्ट पथ पर, संकटों से मत डरो में छंद है - हरिगीतिका ● मेरी भव बाधा हरो, राधा नागरि सोय, जा तन की झांई परे, श्यामु हरित दु्रति होय में छंद है - दोहा ● नील सरोरूह स्याम, तरून अरून वारिज नयन, करउ सो मम उर धाम, सदा छीरसागर सयन में छंद है - सोरठा ● प्रबल जो तुम में पुरूषार्थ हो, सुलभ कौन तुम्हे न पदार्थ हो। प्रगति के पथ पर विचरो उठो, भुवन में सुख-शांति भरो उठो ॥ में छंद है - दु्रतविलम्बित ● मत मुखर होकर बिखर यों, तू मौन रह मेरी व्यथा, अवकाश है किसको सुनेगा, कौन यह तेरी कथा। में छंद है - हरिगीतिका ● "विलसता कटि में पट पीत था। रुचिर वस्त्र विभूषित गात था। लस रही उर में बलमाल थी। कल दुकूल अलंकृत स्कंध था" में छंद है - चौपाई ● या लकुटी अरू कामरिया पर, राज तिहुं पुर को तजि डारो में छंद है - मतगयंद सवैया ● रहिमन मोहि न सुहाय, अमिय पियावत मान बिनु, वरन विष देय बुलाय, मान सहित मरिबो भलो में छंद होगा - सोरठा ● निज भाषा उन्नति अहे, सब उन्नति को मूल। बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटे न हिय को शूल में छंद होगा - दोहा ● इस भांति गदगद कंठ से तू,रो रही है हाल में रोती फिरेगी कौरवो की, नारियां कुछ काल में यहां छंद है - हरिगीतिका ● बोला बचन नीति अति पावन, सुनहु तात कुछ मोर सिखावन में छंद है - चौपाई ● निसि द्यौंस ख्री उर मांझ अरी, छवि रंग भरी मुरि चाहनि की। तकि मोर नित्यो खल ढोरि रहे, टरिगो हिय ढोरनि बाहनि की में छंद है - दुर्मिल सवैया ● छंद के प्रकार है - मात्रिक और वर्णिक छंद (गण बध्द और मुक्तक) ● चार से अधिक चरण वाले छंद कहलाते हैं - विषम छंद (कवित्त और कुण्डलिया) ● कवित्त छंद के भेद है - मनहरण कवित्त और घनाक्षरी ● मनहरण कवित्त के प्रत्येक चरण में वर्ण होते हैं - 31 (8 8 7 8 वर्णो पर यति) ● घनाक्षरी छंद के भेद है - रूप घनाक्षरी (32 वर्ण ) और देव घनाक्षरी (33 वर्ण) ● सवैया के तीन प्रकार है - भगण से बना हुआ, सगण से बना हुआ और जगण से बना हुआ ● सवैया छंद के भेद है - मतगयंद (मालती) सवैया, सुमुखी सवैया, चकोर सवैया (23 वर्ण), किरीट सवैया, दुर्मिल सवेया, अरसात सवैया (24 वर्ण), सुंदरी सवैया, अरविंद सवैया, लवंगलता सवैया (25 वर्ण) एवं सुख सवैया या कुंदलता सवैया (26 वर्ण) ● आचार्य भरत ने नाटयशास्त्र में रस माने है - उन्होंने नाटक में आठ रस माने है ● नवां रस 'शांत रस' कब से स्वीकार किया गया - हर्षवर्ध्दन रचित नागानंद नाटक की रचना के बाद ● वात्सल्य रस की स्थापना कब हुई - महाकवि सूरदास द्वारा वात्सल्य सम्बन्धित मधुर पद से ● भक्ति को रस रूप माना गया - भक्ति रसामृत सिंधु और उवल नीलमणि नामक ग्रंथ की रचना के बाद ● रसों की कुल संख्या है - वर्तमान में 11 ● रस शब्द किसके योग से बना है - रस् + अच् ● नाटयशास्त्र के आधार पर रस की परिभाषा है - स्थाई भाव, विभाव, अनुभाव और संचारी भाव के संयोग से रस की निष्पति होती है। ● आनंदवर्धन ने रस की परिभाषा दी है - रस का आश्रमय ग्रहण कर काव्य में अर्थ नवीन और सुंदर रूप धारण कर सामने आता है। ● काव्य पढ़ने के बाद ह्दय में जो भाव जगते हैं उसे रस कहते हैं यह परिभाषा दी है - डॉ. दशरथ औझा ने ● रस के अंग (अवयव) है - चार, विभाव, अनुभाव, संचारी और स्थाई ● विभाव का अर्थ है - कारण। लोक में रति आदि स्थायी भावों की उत्पति के जो कारण होते हैं उन्हें विभाव कहते है। ● विभाव के प्रकार है - 1 आलम्बन (विषयालम्बन और आश्रयालम्बन), 2 उद्दीपन (आलम्बन की चेष्टा और प्रकृति तथा वातावरण को उद्दीप्त करने वाली वस्तु) ● विषयालम्बन कहते हैं - उन रति आदि भावों का जो आधार है वह आश्रय है। ● आश्रयालम्बन कहते हैं - उन रति आदि भावों का जो आधार है वह आश्रय है। ● उद्दीपन विभाव कहते हैं - स्थाई भाव को और अधिक उद्प्रबुध्द, उद्दीप्त और उत्तेजित करने वाले कारण को कहते है। ● अनुभाव कहते हैं - विभावों के उपरांत जो भाव उत्पन्न होते हैं उन्हें अनुभाव कहते है। ● "बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाई, सौंह करे, भौंहनि हंसे, दैन कहै नटि जाय" में अनुभाव है? ● - गोपियों की चेष्टाएं, सौंह करे, भौंहनि हंसे आदि अनुभाव है। ● अनुभाव के प्रकार है - 1 कायिक (शारीरिक), 2 मानसिक, 3 आहार्य (बनावटी), 4 वाचिक (वाणी), 5 सात्विक (शरीर के अंग विकार) ● सात्विक अनुभाव की संख्या है - आठ। स्तम्भ, स्वेद, रोमांच, स्वरभंग, वेपथु, वैवण्य, अश्रु, प्रलय ● नायिका के अनुभाव माने गए है - 28 प्रकार के। ● व्यभिचारी या संचारी भाव कहते हैं - वह भाव जो स्थायी भाव की ओर चलते है, जिससे स्थायी भाव रस का रूप धारण कर लेवे। इसे यो भी कह सकते हैं जो भाव रस के उप कारक होकर पानी के बुलबुलों और तरंगों की भांति उठते और विलिन होते है। उन्हें व्यभिचारी या संचारी भाव कहते है। ● संचारी भाव के भेद है - भरत मुनि ने 33 संचारी भाव माने है (निर्वेद, ग्लानि, शंका, असूया, मद, श्रम, आलस्य, देन्य, चिंता, मोह, स्मृति, घृति, ब्रीडा, चपलता, हर्ष, आवेग, जड़ता, गर्व, विषाद, औत्सुक्य, निद्रा, अपस्मार, स्वप्न, विबोध, अमर्ष, अविहित्था, उग्रता, मति, व्याधि, उन्माद, मरण, वितर्क) महाकवि देव ने 34 वां संचारी भाव छल माना लेकिन वह विद्वानों को मान्य नहीं हुआ। महाराज जसवंत सिंह ने भारतभूषण में 33 संचारी भावों को गीतात्मक रूप में लिखा है। ● स्थायी भाव का अर्थ है - जिस भाव को विरोधी या अविरोधी भाव आने में न तो छिपा सकते हैं और न दबा सकते हैं और जो रस में बराबर स्थित रहता है। ● 'हा राम! हा प्राण प्यारे। जीवित रहूं किसके सहारे' में रस है - करूण रस ● हे खग मृग हे मधुकर श्रेणी। तुम देखी सीता मृगनैनी॥ में रस है - वियोग शृंगार रस ● स्थायी भाव की विशेषताएं है - अन्य भावों को लीन करने की, विभाव, अनुभाव, संचारी भाव से पुष्ट होकर रस में बदलता है। ● स्थायी भाव के भेद है- प्राचीन काव्यशास्त्रियों के अनुसार नौ तथा आधुनिक के अनुसार 11 ● स्थायी भाव के भेद के नाम - रति, शोक, क्रोध, उत्साह, ह्यास, भय, विस्मय, घृणा, निर्वेद, आत्म स्नेह और ईष्ट विषयक रति। ● भाव और रस में अंतर है - ● - भाव का सम्बन्ध रज, तम, सतो गुण से है रस में सत्व का उद्रेक होता है। ● - भाव का उदय मनुष्य ह्दय से, रस आस्वादन आनंद रूप में होता है। ● - रस की अनुभूति शाश्वत पर भावों की अनुभूति क्षणिक होती है। ● - रस का उदय अद्वेत रूप में जबकि भावों का उदय खण्ड रूप में होती है। ● शृंगार रस का परिचय है - विभाव, अनुभाव, संचारी भाव के संयोग से पति-पत्नी का या प्रेमी-प्रेमिका का रति स्थायी भाव शृंगार रस कहलाता है। यह रस विष्णु देवता से सम्बन्धित है। इसके आश्रय और आलम्बन नायक-नायिका है। ● शृंगार रस के भेद है- संयोग और वियोग ● वियोग शृंगार के भेद है - पूर्वराग, मान, प्रवास, अभिशाप (करूण विरह) ● हास्य रस का परिचयन है - हास्य रस का स्थायी भाव हास हे। इसका आलम्बन विलक्षण प्राणी या हंसी जगाने वाली वस्तु तथा आश्रय दर्शक है। इस रस के देवता प्रमथ है। ● हास्य रस के भेद है - स्मित, हसित, विहसित, अपहसित, प्रतिहसित ● अपहसित का अभप्राय है - हंसते-हंसते नेत्र से आंसू निकल पडे। ● प्रतिहसित का अर्थ है - सारा शरीर हिले और लोटपोट हो जाए। ● करूण रस का परिचय है - करूण रस का स्थायी भाव शोक है। दु:खी, पीड़ित या मृत व्यक्ति आलम्बन विभाव और उससे सम्बन्ध रखने वाली वस्तुओं को तथा अन्य सम्बन्धियों को देखना उद्दीपन विभाव है। ● वियोग शृंगार और करूण रस में अंतर है - ● - वियोग शृंगार में मिलन की आस रहती है किंतु करूण रस में आस समाप्त हो जाती है। ● - वियोग शृंगार के देवता श्याम है जबकि करूण रस के देवता यम है। ● - वियोग शृंगार सुखात्मक भी होता है जबकि करूण रस पूरी तरह दुखात्मक होता है। ● वीर रस का परिचय है- कठिन कार्य (शत्रु के अपकर्ष, दीन दुर्दशा या धर्म की दुर्गती मिटाने) के करने का जो तीव्र भाव ह्दय में उत्पन्न होता है उसे उत्साह कहते है। यही उत्साह विभा, अनुभाव और संचारियों के योग से वीर रस में तब्दील हो जाता है। ● वीर रस के भेद है -युध्द वीर, दानवीर, दयावीर और धर्मवीर ● रोद्र रस की परिभाषा दीजिए- रोद्र रस का स्थायी भाव क्रोध है। अपने विरोधी अशुभ चिंतक आदि की अनुचित चेष्टा से अपने अपमान अनिष्ठ आदि कारणों से क्रोध उत्पन्न होता है वह उद्दीपन विभाव, मुष्टि प्रहार अनुभाव और उग्रता संचारी भाव से मेल कर रोद्र रस बन जाता है। ● भयानक रस का परिचय है - भय इसका स्थायी भाव है। सिंह, सर्प, भंयकर जीव, प्राकृतिक दृश्य, बलवान शत्रु को देखकर या वर्णन सुनकर भय उत्पन्न होता है। स्त्री, नीच मानव, बालक आलम्बन है। व्याघ्र उद्दीपन विभाव और कम्पन अनुभाव, मोह त्रास संचारी भाव है। ● बौरो सबे रघुवंश कुठार की, धार में वार बाजि सरत्थहिं। बान की वायु उडाय के लच्छन, लच्छ करौं अरिहा समरत्थहिं॥ में रस है - रोद्र रस ● जौ तुम्हारि अनुसासन पावो, कंदूक इव ब्रह्माण्ड उठावों। काचे घट जिमि डारों फोरी संकऊं मेरू मूसक जिमि तोरी में रस है - रोद्र ● 'शोक विकल सब रोवहिं रानी, रूप शील बल तेज बखानी, करहिं विलाप अनेक प्रकारा, परहिं भूमि-तल बारहिं बारा' में रस है - करूण ● वीभत्स रस की परिभाषा है - वीभत्स रस का स्थायई भाव जुगुप्सा है। दुर्गन्धयुक्त वस्तुओं, चर्बी, रूधिर, उद वमन आदि को देखकर मन में घृणा होती है। ● अद्भूत रस का परिचय है - इस रस का स्थायी भाव विस्मय है। अलौकिक एवं आश्चर्यजनक वस्तुओं या घटनाओं को देखकर जो विस्मय भाव हृदय में उत्पन्न होता है उसमें अलौकिक वस्तु आलम्बन विभाव और माया आदि उद्दीपन विभाव है। ● शांत रस की व्याख्या कीजिएि - शांत रस का विषय वैराग्य एवं स्थायी भाव निर्वेद है। संसार की अनित्यता एवं दुखों की अधिकता देखकर हृदय में विरक्ति उत्पन्न होती है। सांसारिक अनित्यता-दर्शन आलम्बन और सजन संगति उद्दीपन विभाव है। ● शांत रस का उदाहरण है - हरि बिनु कोऊ काम न आवै, यह माया झूठी प्रपंच लगि रतन सौ जनम गंवायो ● वात्सल्य रस का परिचय दीजिए- इसका स्थायी भाव वत्सल है। इसमें अल्पवयस्क शिशु आलम्बन विभाव, उसकी तोतली बोली एवं बाल चेष्टाएं उद्दीपन विभाव है। ● भक्ति रस की परिभाषा है - स्थायी भाव देव विषयक रति आराध्य देव, आलम्बन, सांसारिक कष्ट एवं अतिशत दुख उद्दीपन विभाव है। दैन्य, मति, वितर्क, ग्लानि आदि संचारी भाव है। ● रस को आनंद स्वरूप मानने वाले तथा अभिव्यक्तिवाद के संस्थापक है - अभिनव गुप्त ● भट्टनायक ने किस रस सिध्दांत की स्थापना की - भुक्तिवाद की। ● संयोग शृंगार का उदाहरण है - बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय ● वियोग शृंगार का उदाहरण है- कागज पर लिखत न बनत, कहत संदेश लजाय ● 'एक और अजगरहि लखि, एक और मृगराय, विकल बटोही बीच ही, परयो मूरछा खाय' में रस है - भयानक रस ● आचार्य भट्लोल्लट का उत्पतिवाद है - आचार्य के अनुसार रस वस्तुत: मूल पात्रों में रहता। दर्शक में भ्रम होने से रस की उत्पति होती है। ● आचार्य शंकुक का अनुमितिवाद है - रंगमंच पर कलाकार के कुशल अभिनय से उसमें मूल पात्र का कलात्मक अनुमान होता है, जैसे चित्र में घोड़ा वास्तविक नहीं होता है, देखने वाला अश्व का अनुमान लगाता है। ● आचार्य अभिनवगुप्त के अभिव्यक्तिवाद के निष्पति का अर्थ है - विभव, अनुभाव आदि से व्यक्त स्थायी भाव रस की अभिव्यक्ति करता है। इस प्रक्रिया में काव्य पढ़ते या नाटक देखते हुए व्यक्ति स्व और पर का भेद भूल जाता है और स्वार्थवृति से परे पहुंचकर अवचेतन में अभिव्यक्त आनंद का आस्वाद लेने लगता है। ● मन रे तन कागद का पुतला। लागै बूंद विनसि जाय छिन में गरब करै क्यों इतना॥ में रस है - शांत रस ● अंखिया हरि दरसन की भूखी। कैसे रहे रूप रस रांची ए बतियां सुनि रूखी। में रस है - वियोग शृंगार ● रिपु आंतन की कुण्डली करि जोगिनी चबात, पीबहि में पागी मनो, जुबति जलेबी खात॥ में निहित रस है - जुगुप्सा, वीभत्स ● मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई में रस निहित है - ईश्वर रति, भक्ति ● यह लहि अपनी लकुट कमरिया, बहुतहि नाच नचायौ। में रस निहित है - वत्सल, वात्सल्य ● समस्त सर्पो संग श्याम यौ ही कढे, कलिंद की नंदिनि के सु अंक से। खडे किनारे जितने मनुष्य थे, सभी महाशंकित भीत हो उठे॥ में निहित रस है - भय, भयानक ● देखि सुदामा की दीन दसा, करूणा करि के करूणानिधि रोये। में रस है - शोक, करूण ● मैं सत्य कहता हूं सखे! सुकुमार मत जानो मुझे। यमराज से भी युध्द में, प्रस्तुत सदा जानो मुझे॥ में रस है - उत्साह, वीर ● 'एक और अजगरहि लखि, एक ओर मृगराज। विकल बटोहीं बीच ही, परयो मूरछा खाय' में रस है - भयानक ● पुनि-पुनि प्रभुहि चितव नरनाहू, पुलक गात, उर अधिक उछाहू। में कौनसा अनुभाव है - कायिक, सात्विक, मानसिक ● रस के मूल भाव को कहते हैं - स्थायी भाव ● चित्त के वे स्थिर मनोविकार जो विरोधी अथवा अविरोधी, प्रतिकू अथवा अनुकूल दोनों प्रकार की स्थितियों को आत्मसात कर निरंतर बने रहे रहते हैं कहलाते हैं - स्थायी भाव ● वे बाह्य विकार जो सहृदय में भावों को जागृत करते हैं कहलाते हैं - विभाव ● स्थायी भाव को उद्दीप्त या तीव्र करने वाले विभाव कहलाते हैं - उद्दीपन ● जिसके मन में भाव या रस की उत्पति होती है उसे कहते हैं - आश्रय ● रोमांच, स्वेद, अश्रु, कंप, वैवण्र्य आदि कौनसे अनुभाव है - सात्विक ● जिनके द्वारा आलम्बन के मन में जागृत होने वाले स्थायी भाव की जानकारी होती है उन्हें कहते हैं - अनुभाव ● करूण रस का स्थायी भाव है - शोक ● देखन मिस मृग विहंग तरू, फिरति बहोरि-बहोरि, निरखि-निरखि रघुवीर-छवि। काव्यांश में आश्रय है - सीता ● अधिक सनेह देह भई भोरी। सरद-ससिहि जनु चितव चकोरी।। लोचन मग रामहि उर आनी, दीन्हें पलक कपाट सयानी।। उक्त चौपाई में रस है - शृंगार ● मधुबन तुम कत रहत हरे, विरह वियोग स्याम सुंदर के, ठाडे क्यो न जरे ? काव्यांश में आलम्बन है - श्याम सुंदर ● सुन सुग्रीव मैं मारि हो, बालि हिं एकहि बान, ब्रह्मा रूद्र सरणागत, भयउ न उबरहि प्रान। काव्यांश में व्यक्त उत्साह भाव का आलम्बन कौन है - सुग्रीव ● कामायनी कुसुम पर पडी, न वह मकरंद रहा। एक चित्र बस रेखाओं का, अब उसमें है रंग कहा। पंक्तियों में निहित स्थायी भाव व आश्रय है - शोक, मनु ● समता लहि सीतल भया, मिटी मोह की ताप, निसि वासर सुख निधि लह्या, अंतर प्रगट्या आप में स्थायी भाव है - निर्वेद ● भाषे लखन कुटिल भई भौहे। रद पद फरकत नयन रिसौहें। रघुबंसिन मंह जहं कोउ होई। तेहि समाज अस कहै न कोई। में रस है - उत्साह, वीर